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दिसंबर, 2024 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

"क्यों करें एमपीपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी"

"क्यों करें एमपीपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी" यह सवाल हर उस छात्र के मन में आता है जो मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) की परीक्षा के बारे में सोच रहा हो। यह प्रश्न केवल करियर की दिशा में सही कदम उठाने से जुड़ा नहीं है, बल्कि इसके जरिए समाज और राष्ट्र के प्रति योगदान देने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी मिलता है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं: 1. सरकारी सेवा में स्थायित्व और सम्मान : एमपीपीएससी के माध्यम से चयनित उम्मीदवार राज्य सरकार की विभिन्न प्रतिष्ठित सेवाओं में कार्य करते हैं। इन सेवाओं में स्थायित्व, नियमित वेतन, और अतिरिक्त भत्तों का प्रावधान होता है। सरकारी नौकरी न केवल आर्थिक स्थिरता प्रदान करती है, बल्कि समाज में एक सम्मानजनक स्थान भी देती है। 2. समाज और राष्ट्र के प्रति योगदान: सिविल सेवा अधिकारी समाज के विकास में सीधा योगदान देते हैं। वे नीतियों का क्रियान्वयन, प्रशासनिक सुधार, और जनकल्याण की योजनाओं को लागू करते हैं। इस भूमिका में रहते हुए, आप लाखों लोगों की जिंदगी बदलने का अवसर पाते हैं। 3. करियर ग्रोथ और अवसर: एमपीपीएससी के माध्यम से डीएसपी, तहसीलदार, सहा...

लॉर्ड लुइस माउंटबेटन (Lord Louis Mountbatten)

लॉर्ड लुइस माउंटबेटन (Lord Louis Mountbatten) भारत के अंतिम वायसराय और स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर-जनरल थे। उन्होंने भारत के इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके द्वारा किए गए प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं: 1. भारत का विभाजन: माउंटबेटन को भारत का अंतिम वायसराय नियुक्त किया गया था और उन्होंने 15 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान के विभाजन को अंजाम दिया। माउंटबेटन योजना (3 जून 1947) के तहत भारत और पाकिस्तान दो स्वतंत्र राष्ट्रों के रूप में स्थापित किए गए। विभाजन के दौरान उन्होंने हिंदू और मुस्लिम नेताओं से परामर्श करके शांतिपूर्ण विभाजन की कोशिश की, हालांकि विभाजन के बाद बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे हुए। 2. भारत को स्वतंत्रता दिलाने में भूमिका: उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 को लागू किया, जिसके तहत भारत और पाकिस्तान को स्वतंत्रता प्रदान की गई। उन्होंने ब्रिटिश सरकार से स्वतंत्रता की प्रक्रिया को तेज करने के लिए समर्थन प्राप्त किया। 3. पहले गवर्नर-जनरल के रूप में कार्य: माउंटबेटन स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर-जनरल बने (1947-1948)। उन्होंने प्रारंभिक प्रशासनिक और संवैधानिक चुन...

ऐनी बेसेंट (Annie Besant)

ऐनी बेसेंट (Annie Besant) ए क प्रमुख आयरिश महिला थीं, जिन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक सुधार में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके द्वारा भारत में किए गए कार्य निम्नलिखित हैं: 1. भारत में थियोसोफिकल सोसायटी का प्रचार: ऐनी बेसेंट ने मद्रास (अब चेन्नई) के पास अडयार में थियोसोफिकल सोसायटी का मुख्यालय स्थापित किया। उन्होंने भारतीय दर्शन, वेद, उपनिषद, और गीता का प्रचार-प्रसार किया और भारतीय संस्कृति को पुनर्जीवित करने में मदद की। 2. होम रूल आंदोलन: ऐनी बेसेंट ने 1916 में होम रूल लीग की स्थापना की। उन्होंने भारत में स्वशासन (Home Rule) की मांग को लेकर व्यापक प्रचार-प्रसार किया। इस आंदोलन के माध्यम से भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को नई ऊर्जा मिली। 3. कांग्रेस में योगदान: 1917 में ऐनी बेसेंट भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष बनीं। वह कांग्रेस अध्यक्ष बनने वाली पहली महिला थीं। 4. सामाजिक सुधार कार्य: उन्होंने बाल विवाह, जाति व्यवस्था, और महिलाओं की अशिक्षा के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने महिला शिक्षा और अधिकारों के लिए काम किया। 5. शिक्षा के क्षेत्र में योगदान: बनारस में सेंट्रल हिंदू कॉ...

दादाभाई नौरोजी के महत्वपूर्ण कार्य

दादाभाई नौरोजी के महत्वपूर्ण कार्य  दादाभाई नौरोजी (1825-1917) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेताओं में से एक थे। उन्हें "भारतीय राजनीति के पितामह" के रूप में जाना जाता है। उनके योगदान और कार्यों की सूची निम्नलिखित है: भारत की राष्ट्रीय आय का सर्वप्रथम आकलन दादाभाई नौरोजी ने किया था। उन्होंने अपनी पुस्तक "पॉवर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया" (1876) में भारत की राष्ट्रीय आय का विश्लेषण किया और भारत की आर्थिक स्थिति पर प्रकाश डाला। प्रमुख तथ्य: 1. दादाभाई नौरोजी का आकलन: उन्होंने ब्रिटिश शासन के दौरान भारत की गरीबी और आर्थिक शोषण की जांच की। उनके आकलन के अनुसार, भारत की प्रति व्यक्ति वार्षिक आय लगभग 20 रुपये थी। यह विश्लेषण भारत में व्याप्त गरीबी और ब्रिटिश शासन द्वारा किए जा रहे आर्थिक शोषण को उजागर करता है। 2. आधुनिक दृष्टिकोण: हालांकि दादाभाई नौरोजी का आकलन सीमित डेटा और साधनों के आधार पर था, लेकिन यह पहला प्रयास था, जिसने भारत की अर्थव्यवस्था पर ध्यान केंद्रित किया। इसे बाद में विभिन्न अर्थशास्त्रियों ने और अधिक सटीकता से दोहराया। दादाभाई नौरोजी का यह कार...

सिराजुद्दौला, मीर जाफर, शुजाउद्दौला, और शाह आलम द्वितीय

मीर जाफर यहाँ दिए गए नाम 18वीं शताब्दी के भारत में राजनीतिक परिवर्तनों और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के उदय के संदर्भ में बेहद महत्वपूर्ण हैं। 1. सिराजुद्दौला (नवाब बंगाल): सिराजुद्दौला बंगाल के अंतिम स्वतंत्र नवाब थे। उनका शासनकाल (1756-1757) छोटा था, लेकिन उन्होंने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के बढ़ते प्रभाव का विरोध किया। प्लासी का युद्ध (1757) उनके शासन का महत्वपूर्ण मोड़ था, जिसमें मीर जाफर के विश्वासघात के कारण उनकी हार हुई। यह युद्ध भारत में ब्रिटिश शासन के प्रारंभ का प्रतीक बना। 2. मीर जाफर: मीर जाफर सिराजुद्दौला के सेना के कमांडर थे। प्लासी के युद्ध में उन्होंने ब्रिटिशों का साथ देकर सिराजुद्दौला के खिलाफ साजिश की। युद्ध के बाद मीर जाफर बंगाल के नवाब बने, लेकिन उनकी स्थिति ब्रिटिशों के कठपुतली शासक की थी। उनकी भूमिका ने भारत में ब्रिटिश साम्राज्य को स्थापित करने में मदद की। 3. शुजाउद्दौला (अवध के नवाब): शुजाउद्दौला अवध के नवाब थे और बक्सर के युद्ध (1764) में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने मीर कासिम (मीर जाफर के उत्तराधिकारी) और मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय के साथ मिलकर अंग्र...

भारत की प्रमुख झीलें की सूची

भारत की प्रमुख झीलें और उनके स्थान की सूची निम्नलिखित है: मीठे पानी की झीलें: 1. डल झील - श्रीनगर, जम्मू और कश्मीर 2. वुलर झील - जम्मू और कश्मीर (भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील) 3. नैनी झील - नैनीताल, उत्तराखंड 4. भिमताल झील - नैनीताल, उत्तराखंड 5. लोकटक झील - मणिपुर (तैरते द्वीपों के लिए प्रसिद्ध) 6. छिल्का झील - ओडिशा (खारे पानी की झील, लेकिन पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण स्थान) खारे पानी की झीलें: 7. सांभर झील - राजस्थान (भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की झील) 8. चिल्का झील - ओडिशा (भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की लैगून झील) 9. पुलिकट झील - आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के बीच कृत्रिम झीलें: 10. गोविंद सागर झील - हिमाचल प्रदेश (भाखड़ा नांगल बांध पर बनी) 11. राणा प्रताप सागर झील - राजस्थान 12. जयसमंद झील (ढेबर झील) - राजस्थान (भारत की सबसे बड़ी कृत्रिम झील) 13. उदयसागर झील - राजस्थान 14. हुसैन सागर झील - हैदराबाद, तेलंगाना अनूठी झीलें: 15. लोनार झील - महाराष्ट्र (गड्ढा झील) 16. पांगोंग त्सो झील - लद्दाख (खारे पानी की झील, जो भारत और चीन के बीच स्थित है) 17. त्सो मोरीरी झील - लद्दाख ये झीलें ...

भारत के प्रमुख बंदरगाह

भारत के प्रमुख बंदरगाह और उनके स्थानों की सूची निम्नलिखित है: पश्चिमी तट पर स्थित प्रमुख बंदरगाह: 1. कांडला (देेेेेेेंदयाल पोर्ट) - गुजरात 2. मुंबई पोर्ट - महाराष्ट्र 3. नवी मुंबई (जेएनपीटी) - महाराष्ट्र 4. मंगळुरु (न्यू मंगलोर पोर्ट) - कर्नाटक 5. कोचीन पोर्ट - केरल 6. मोरमुगाओ पोर्ट - गोवा पूर्वी तट पर स्थित प्रमुख बंदरगाह: 7. कोलकाता पोर्ट (श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट) - पश्चिम बंगाल 8. हल्दिया पोर्ट - पश्चिम बंगाल 9. पारादीप पोर्ट - ओडिशा 10. विजाग पोर्ट (विशाखापत्तनम पोर्ट) - आंध्र प्रदेश 11. चेन्नई पोर्ट - तमिलनाडु 12. एन्नोर पोर्ट (कामराजर पोर्ट) - तमिलनाडु 13. तुतीकोरिन पोर्ट (वीओसी पोर्ट) - तमिलनाडु द्वीपों पर स्थित प्रमुख बंदरगाह: 14. पोर्ट ब्लेयर - अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह ये बंदरगाह भारत के व्यापार और नौवहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

गवर्नर-जनरल और वायसराय के कार्यकाल

भारत के प्रमुख गवर्नर जनरल कौन वायसराय  भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान कई गवर्नर-जनरल और वायसराय हुए, जिन्होंने देश की प्रशासनिक और राजनीतिक संरचना को प्रभावित किया। नीचे प्रमुख गवर्नर-जनरल, उनके कार्यकाल, और उनके कार्यों एवं घटनाओं की सूची दी गई है 1. वॉरेन हेस्टिंग्स (1773-1785) महत्वपूर्ण कार्य/घटनाक्रम: भारत के पहले गवर्नर-जनरल। रेग्युलेटिंग एक्ट, 1773 लागू किया। राजस्व और न्याय व्यवस्था में सुधार। बंगाल में "दिवानी" और "फौजदारी" अदालतों की स्थापना। अंग्रेजी प्रशासनिक व्यवस्था की नींव रखी। 2. लॉर्ड कॉर्नवालिस (1786-1793) महत्वपूर्ण कार्य/घटनाक्रम: स्थायी बंदोबस्त प्रणाली (Permanent Settlement) की शुरुआत। भारतीय प्रशासनिक सेवा (Civil Services) की नींव रखी। भारत में प्रशासनिक सुधार लागू किए। 3. लॉर्ड वेलेस्ली (1798-1805) महत्वपूर्ण कार्य/घटनाक्रम: सहायक संधि प्रणाली (Subsidiary Alliance) की शुरुआत। मराठा और मैसूर साम्राज्य के खिलाफ युद्ध। कलकत्ता में फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना। 4. लॉर्ड विलियम बेंटिक (1828-1835) महत्वपूर्ण कार्य/घटनाक्रम: सती प्रथा का उन्मूलन (...

भारत के राष्ट्रीय प्रतीक

भारत के राष्ट्रीय प्रतीक और उनसे संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी निम्नलिखित है: 1. राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ (सारनाथ से लिया गया) इसमें चार शेर हैं, जो शक्ति, साहस, आत्मविश्वास और गौरव का प्रतीक हैं। नीचे धर्म चक्र, बैल, हाथी और घोड़े की आकृतियाँ हैं। इसे 26 जनवरी 1950 को अपनाया गया। 2. राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा (तीन रंग: केसरिया, सफेद और हरा) मध्य में नीला धर्म चक्र (24 तीलियाँ) है। इसे 22 जुलाई 1947 को अपनाया गया। यह स्वतंत्रता, शांति और हरियाली का प्रतीक है। 3. राष्ट्रीय गान जन गण मन रचयिता: रवींद्रनाथ टैगोर इसे 24 जनवरी 1950 को राष्ट्रीय गान के रूप में स्वीकार किया गया। 4. राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् रचयिता: बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय यह "आनंदमठ" उपन्यास से लिया गया है। इसे 1937 में राष्ट्रीय गीत का दर्जा मिला। 5. राष्ट्रीय पशु बाघ इसे 1973 में राष्ट्रीय पशु घोषित किया गया। यह ताकत, शौर्य और सुंदरता का प्रतीक है। 6. राष्ट्रीय पक्षी मोर इसे 1963 में राष्ट्रीय पक्षी घोषित किया गया। यह सुंदरता और गर्व का प्रतीक है। 7. राष्ट्रीय फूल कमल यह पवित्रता, सौंदर्य और समृद्धि का प्रतीक है। 8. र...

भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त और उनके कार्यकाल

यहाँ भारत के मुख्य चुनाव आयुक्तों (Chief Election Commissioners) और उनके कार्यकाल की सूची दी गई है: 1. सुकुमार सेन कार्यकाल: 21 मार्च 1950 – 19 दिसंबर 1958 महत्वपूर्ण जानकारी:  पहले मुख्य चुनाव आयुक्त। भारत के पहले आम चुनाव (1951-52) का संचालन किया। 2. केवीके सुंदरम कार्यकाल: 20 दिसंबर 1958 – 30 सितंबर 1967 महत्वपूर्ण जानकारी: मतदाता सूची को अद्यतन और व्यवस्थित किया। 3. एस.पी. सेन वर्मा कार्यकाल: 1 अक्टूबर 1967 – 30 सितंबर 1972 महत्वपूर्ण जानकारी: चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर। 4. डॉ. नागेंद्र सिंह कार्यकाल: 1 अक्टूबर 1972 – 6 फरवरी 1973 महत्वपूर्ण जानकारी: उनका कार्यकाल बहुत छोटा था। 5. टी. स्वामीनाथन कार्यकाल: 7 फरवरी 1973 – 17 जून 1977 महत्वपूर्ण जानकारी: इमरजेंसी के दौरान चुनावों का संचालन। 6. एस. एल. शकधर कार्यकाल: 18 जून 1977 – 17 जून 1982 महत्वपूर्ण जानकारी: 1977 के आम चुनावों में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव। 7. आर. के. त्रिवेदी कार्यकाल: 18 जून 1982 – 31 दिसंबर 1985 महत्वपूर्ण जानकारी: चुनाव प्रबंधन में तकनीकी सुधार। 8. आर. वी. एस. परशुराम कार्यकाल: 1 जनवरी 1986 – 25...

भारत के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और उनके कार्यकाल

यहां भारत के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justices of India) और उनके कार्यकाल की पूरी सूची दी गई है: 1. एच. जे. कनिया (H. J. Kania) कार्यकाल: 26 जनवरी 1950 – 6 नवंबर 1951 महत्वपूर्ण जानकारी: भारत के पहले मुख्य न्यायाधीश। 2. एम. पाठक (M. Patanjali Sastri) कार्यकाल: 7 नवंबर 1951 – 3 जनवरी 1954 महत्वपूर्ण जानकारी: संवैधानिक कानून के क्षेत्र में विशेषज्ञ। 3. मेहर चंद महाजन (Mehr Chand Mahajan) कार्यकाल: 4 जनवरी 1954 – 22 दिसंबर 1954 महत्वपूर्ण जानकारी: भारत में न्यायिक स्वतंत्रता को बढ़ावा दिया। 4. बी. के. मुखर्जी (B. K. Mukherjea) कार्यकाल: 23 दिसंबर 1954 – 31 जनवरी 1956 महत्वपूर्ण जानकारी: संवैधानिक और नागरिक कानून के विशेषज्ञ। 5. एस. आर. दास (S. R. Das) कार्यकाल: 1 फरवरी 1956 – 30 सितंबर 1959 महत्वपूर्ण जानकारी: भारत में न्यायिक प्रक्रिया का विकास। 6. बी. पी. सिन्हा (B. P. Sinha) कार्यकाल: 1 अक्टूबर 1959 – 31 जनवरी 1964 महत्वपूर्ण जानकारी: भारतीय न्यायपालिका में सुधार लाने पर जोर। 7. पी. बी. गजेंद्रगडकर (P. B. Gajendragadkar) कार्यकाल: 1 फरवरी 1964 – 15 मार्च 1966 महत्वपूर्ण ...

भारत में लोकसभा अध्यक्ष

भारत में लोकसभा अध्यक्ष (Speaker of Lok Sabha) का महत्वपूर्ण स्थान है।  1. गणेश वासुदेव मावलंकर कार्यकाल: 15 मई 1952 – 27 फरवरी 1956 महत्वपूर्ण जानकारी: पहले लोकसभा अध्यक्ष, जिन्होंने संसदीय परंपराओं की नींव रखी। 2. अनंतशयनम आयंगर कार्यकाल: 8 मार्च 1956 – 16 अप्रैल 1962 महत्वपूर्ण जानकारी: पहले उपाध्यक्ष से अध्यक्ष बने। 3. हुकम सिंह कार्यकाल: 17 अप्रैल 1962 – 16 मार्च 1967 महत्वपूर्ण जानकारी: संसद में गैर-पक्षपाती भूमिका के लिए प्रसिद्ध। 4. नीलम संजीव रेड्डी कार्यकाल: 17 मार्च 1967 – 19 जुलाई 1969 महत्वपूर्ण जानकारी: बाद में भारत के राष्ट्रपति बने। 5. गुरदयाल सिंह ढिल्लों कार्यकाल: 8 अगस्त 1969 – 1 दिसंबर 1975 महत्वपूर्ण जानकारी: संसदीय प्रक्रियाओं को आधुनिक रूप देने में योगदान। 6. बलिराम भगत कार्यकाल: 15 जनवरी 1976 – 25 मार्च 1977 महत्वपूर्ण जानकारी: आपातकाल के दौरान अध्यक्ष। 7. एन. संजीवा रेड्डी कार्यकाल: 26 मार्च 1977 – 13 जुलाई 1980 महत्वपूर्ण जानकारी: बाद में राष्ट्रपति बने। 8. के. एस. हेगड़े कार्यकाल: 22 जुलाई 1980 – 27 अप्रैल 1984 महत्वपूर्ण जानकारी: संसदीय लोकतंत्र के सशक्त...

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नरों और उनके कार्यकाल

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नरों और उनके कार्यकाल के दौरान घटित महत्वपूर्ण घटनाओं की सूची निम्नलिखित है: 1. सर ओसबोर्न स्मिथ (1935–1937) भारतीय रिजर्व बैंक के पहले गवर्नर। रिजर्व बैंक की स्थापना (1 अप्रैल 1935)। बैंक का प्रारंभिक मुख्यालय कोलकाता में स्थापित किया गया। 2. सर जेम्स ब्रेड टेलर (1937–1943) बैंक का मुख्यालय कोलकाता से मुंबई स्थानांतरित (1937)। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मुद्रास्फीति नियंत्रण। 3. सर सीडी देशमुख (1943–1949) पहले भारतीय गवर्नर। भारतीय अर्थव्यवस्था पर द्वितीय विश्व युद्ध का प्रभाव। 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद अर्थव्यवस्था को स्थिर करने का प्रयास। 4. सर बेनेगल रामा राव (1949–1957) रिजर्व बैंक का राष्ट्रीयकरण (1 जनवरी 1949)। पंचवर्षीय योजनाओं के लिए वित्तीय सहायता। ग्रामीण ऋण और कृषि सुधारों पर जोर। 5. केजी अंबेगांवकर (1957) कार्यकाल छोटा था, बड़ी घटनाएं नहीं। 6. एचवीआर अय्यंगर (1957–1962) औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों के लिए वित्तीय नीति। भारतीय मुद्रा की स्थिरता पर ध्यान। 7. पीसी भट्टाचार्य (1962–1967) मुद्रा का "द्विस्तरीय नियंत्रण" लागू। क...

भारत के प्रधानमंत्री एवं उनके कार्यकाल में शुरू की प्रमुख योजनाएं

यहां भारत के प्रधानमंत्रियों और उनके कार्यकाल के दौरान शुरू की गई प्रमुख योजनाओं की सूची उनके वर्षों के साथ दी गई है: 1. पंडित जवाहरलाल नेहरू (1947-1964) 1. भाखड़ा नांगल परियोजना (1954) 2. पंचवर्षीय योजना का आरंभ (1951) 3. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) स्थापना (1951) 4. राष्ट्रीय विद्युत ग्रिड परियोजना (1956) 5. भारतीय विज्ञान संस्थान का विस्तार 2. गुलजारीलाल नंदा (कार्यवाहक) (27 मई 1964 - 9 जून 1964, 11 जनवरी 1966 - 24 जनवरी 1966) कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में दो बार कार्यभार संभाला।  3. लाल बहादुर शास्त्री (1964-1966) 1. हरित क्रांति का आरंभ (1965) 2. राष्ट्रीय कृषि योजना (1965) 3. अन्न और दूध उत्पादन के लिए "जय जवान, जय किसान" का नारा 4. श्वेत क्रांति (ऑपरेशन फ्लड) (1965) 4. इंदिरा गांधी (1966-1977, 1980-1984) 1. गरीबी हटाओ योजना (1971) 2. बैंकों का राष्ट्रीयकरण (1969) 3. 20 सूत्रीय कार्यक्रम (1975) 4. एकीकृत बाल विकास योजना (ICDS) (1975) 5. परिवार नियोजन कार्यक्रम (1977) 6. राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन 7. आवासीय भूमिहीन योजना 5. मोरारजी देसाई (1977-1979) 1. आं...

भारतीय संसद का प्रथम मंत्रिमंडल

भारतीय संसद का प्रथम मंत्रिमंडल, जिसे नेहरू मंत्रिमंडल कहा जाता है, 15 अगस्त 1947 को भारत की स्वतंत्रता के साथ स्थापित हुआ। इसका गठन जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में हुआ था, जो स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री थे। इस मंत्रिमंडल में कुल 14 सदस्य थे। प्रथम मंत्रिमंडल की सूची: प्रधानमंत्री: 1. जवाहरलाल नेहरू - प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मंत्रियों की सूची: 2. सरदार वल्लभभाई पटेल - गृह मंत्री 3. डॉ. राजेंद्र प्रसाद - कृषि और खाद्य मंत्री 4. मौलाना अबुल कलाम आज़ाद - शिक्षा मंत्री 5. आर.के. शणमुखम चेट्टी - वित्त मंत्री 6. डॉ. बी.आर. अंबेडकर - कानून मंत्री 7. सी. राजगोपालाचारी - उद्योग और आपूर्ति मंत्री 8. बलदेव सिंह - रक्षा मंत्री 9. जॉन मथाई - रेलवे और परिवहन मंत्री 10. जगजीवन राम - श्रम मंत्री 11. राजकुमारी अमृत कौर - स्वास्थ्य मंत्री (भारत की पहली महिला कैबिनेट मंत्री) 12. श्यामाप्रसाद मुखर्जी - उद्योग और आपूर्ति मंत्री 13. वी.एन. गाडगिल - कार्य मंत्री 14. सी.एच. भाभा - वाणिज्य मंत्री विशेषताएं : यह मंत्रिमंडल विभिन्न धर्मों, जातियों, और क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करता था। इसमें स्वतंत्रता...

भारत के प्रधानमंत्रियों और उनके कार्यकाल

भारत के प्रधानमंत्रियों और उनके कार्यकाल  1. पंडित जवाहरलाल नेहरू (15 अगस्त 1947 - 27 मई 1964) भारत के पहले प्रधानमंत्री। भारतीय संविधान का लागू होना (26 जनवरी 1950)। पंचवर्षीय योजनाओं का प्रारंभ। गुटनिरपेक्ष आंदोलन की स्थापना। चीन-भारत युद्ध (1962)। 2. गुलजारीलाल नंदा (कार्यवाहक) (27 मई 1964 - 9 जून 1964, 11 जनवरी 1966 - 24 जनवरी 1966) कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में दो बार कार्यभार संभाला। 3. लाल बहादुर शास्त्री (9 जून 1964 - 11 जनवरी 1966) हरित क्रांति की शुरुआत। "जय जवान, जय किसान" का नारा। भारत-पाकिस्तान युद्ध (1965)। ताशकंद समझौता (1966)। 4. इंदिरा गांधी (24 जनवरी 1966 - 24 मार्च 1977, 14 जनवरी 1980 - 31 अक्टूबर 1984) बैंकों का राष्ट्रीयकरण (1969)। हरित क्रांति का विस्तार। 1971 का भारत-पाक युद्ध, बांग्लादेश का निर्माण। आपातकाल (1975-77)। ऑपरेशन ब्लू स्टार (1984)। 5. मोरारजी देसाई (24 मार्च 1977 - 28 जुलाई 1979) गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री। भारत की परमाणु नीति में सुधार। आपातकाल के दौरान नागरिक अधिकारों को बहाल किया। 6. चरण सिंह (28 जुलाई 1979 - 14 जनवरी 1980) किसानों क...

गोलकोण्डा का किला

गोलकोंडा का किला  हैदराबाद में स्थित  एक ऐतिहासिक किला है। इसका निर्माण वारंगल के राजा ने 14वीं शताब्दी में कराया था। बाद में यह बहमनी राजाओं के हाथ में चला गया और मुहम्मदनगर कहलाने लगा। 1512 ई. में यह कुतबशाही राजाओं के अधिकार में आया और वर्तमान हैदराबाद के शिलान्यास के समय तक उनकी राजधानी रहा। फिर 1687 ई. में इसे औरंगजेब ने जीत लिया। यह ग्रैनाइट की एक पहाड़ी पर बना है जिसमें कुल आठ दरवाजे हैं और पत्थर की तीन मील लंबी मजबूत दीवार से घिरा है। यहाँ के महलों तथा मस्जिदों के खंडहर अपने प्राचीन गौरव गरिमा की कहानी सुनाते हैं। मूसी नदी दुर्ग के दक्षिण में बहती है। दुर्ग से लगभग आधा मील उत्तर कुतबशाही राजाओं के ग्रैनाइट पत्थर के मकबरे हैं जो टूटी फूटी अवस्था में अब भी विद्यमान हैं। यहाँ गोलकोण्डा किला के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है।  गोलकोण्डा का इतिहास  इसे शुरू में शेफर्ड हिल (तेलुगु में गोला कोंडा) कहा जाता था। किंवदंती के अनुसार, इस चट्टानी पहाड़ी पर एक चरवाहा लड़का एक मूर्ति के पास आया। इस पवित्र स्थान के चारों ओर मिट्टी के किले का निर्माण करने वाले शासक काकती...