लॉर्ड लुइस माउंटबेटन (Lord Louis Mountbatten) भारत के अंतिम वायसराय और स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर-जनरल थे। उन्होंने भारत के इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके द्वारा किए गए प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:
1. भारत का विभाजन:
माउंटबेटन को भारत का अंतिम वायसराय नियुक्त किया गया था और उन्होंने 15 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान के विभाजन को अंजाम दिया।
माउंटबेटन योजना (3 जून 1947) के तहत भारत और पाकिस्तान दो स्वतंत्र राष्ट्रों के रूप में स्थापित किए गए। विभाजन के दौरान उन्होंने हिंदू और मुस्लिम नेताओं से परामर्श करके शांतिपूर्ण विभाजन की कोशिश की, हालांकि विभाजन के बाद बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे हुए।
2. भारत को स्वतंत्रता दिलाने में भूमिका:
उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 को लागू किया, जिसके तहत भारत और पाकिस्तान को स्वतंत्रता प्रदान की गई। उन्होंने ब्रिटिश सरकार से स्वतंत्रता की प्रक्रिया को तेज करने के लिए समर्थन प्राप्त किया।
3. पहले गवर्नर-जनरल के रूप में कार्य:
माउंटबेटन स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर-जनरल बने (1947-1948)।
उन्होंने प्रारंभिक प्रशासनिक और संवैधानिक चुनौतियों को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध सुधारने के लिए कूटनीतिक प्रयास किए।
4. संप्रभुता हस्तांतरण:
उन्होंने सुनिश्चित किया कि ब्रिटिश सरकार से भारतीय नेताओं को सत्ता का शांतिपूर्ण और व्यवस्थित हस्तांतरण हो। सत्ता हस्तांतरण के दौरान उन्होंने नेहरू, गांधी, जिन्ना और अन्य नेताओं के साथ समन्वय किया।
5. संविधान सभा का गठन और समर्थन:
माउंटबेटन के कार्यकाल में भारतीय संविधान सभा ने स्वतंत्र भारत के लिए संविधान निर्माण की प्रक्रिया शुरू की।
6. कश्मीर विवाद में भूमिका:
जब 1947 में कश्मीर पर पाकिस्तान और भारत के बीच विवाद हुआ, माउंटबेटन ने इस मुद्दे को संभालने में एक मध्यस्थ की भूमिका निभाई। उन्होंने भारत को सलाह दी कि कश्मीर के मसले को संयुक्त राष्ट्र में ले जाया जाए।
7. भारत-पाकिस्तान सीमा आयोग का गठन:
माउंटबेटन ने भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा रेखा खींचने के लिए सर रेडक्लिफ कमीशन का गठन किया। कमीशन ने पंजाब और बंगाल के विभाजन के लिए सीमा निर्धारित की।
8. साम्प्रदायिक दंगों को नियंत्रित करने का प्रयास:
विभाजन के दौरान साम्प्रदायिक हिंसा हुई, जिसे नियंत्रित करने के लिए माउंटबेटन ने प्रशासनिक कदम उठाए। उन्होंने विभाजन से प्रभावित लोगों की मदद के लिए राहत कार्यों की शुरुआत की।
लॉर्ड माउंटबेटन का कार्यकाल भारतीय उपमहाद्वीप के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ था। हालांकि उनके कार्यों को लेकर विवाद भी हुए, लेकिन उन्होंने भारत को स्वतंत्रता और विभाजन की प्रक्रिया में नेतृत्व प्रदान किया।
लॉर्ड लुइस माउंटबेटन का जीवन परिचय
लॉर्ड लुइस माउंटबेटन (Louis Francis Albert Victor Nicholas Mountbatten) एक ब्रिटिश शाही परिवार के सदस्य, एक अनुभवी नौसैनिक अधिकारी और भारत के अंतिम वायसराय थे। उनका जीवन ब्रिटिश इतिहास और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
प्रारंभिक जीवन
पूरा नाम: लुइस फ्रांसिस अल्बर्ट विक्टर निकोलस माउंटबेटन
जन्म: 25 जून 1900, फ्रॉगमोर हाउस, विंडसर, इंग्लैंड
माता-पिता:
पिता: प्रिंस लुइस ऑफ बैटेनबर्ग
माता: प्रिंसेस विक्टोरिया ऑफ हेस
परिवार: ब्रिटिश शाही परिवार से संबंध था। उनका मूल उपनाम "बैटेनबर्ग" था, लेकिन प्रथम विश्व युद्ध के दौरान इसे "माउंटबेटन" में बदल दिया गया।
शिक्षा:
लॉकर्स पार्क स्कूल:
रॉयल नेवल कॉलेज, ऑस्बॉर्न और डार्टमाउथ
बचपन से ही उन्होंने अनुशासन और नेतृत्व के गुण दिखाए।
सैन्य जीवन:
माउंटबेटन ने ब्रिटिश रॉयल नेवी में अपनी सेवा शुरू की।
उन्होंने प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध में सक्रिय भूमिका निभाई।
द्वितीय विश्व युद्ध में योगदान:
वह दक्षिण-पूर्व एशिया के संबद्ध बलों के सुप्रीम कमांडर रहे।
उन्होंने बर्मा में जापान के खिलाफ अभियानों का नेतृत्व किया।
उनकी रणनीतिक क्षमताओं के लिए उन्हें प्रशंसा मिली।
भारत का वायसराय (1947):
लुइस माउंटबेटन को फरवरी 1947 में भारत का अंतिम वायसराय नियुक्त किया गया।
उनका मुख्य कार्य ब्रिटिश भारत में सत्ता का शांतिपूर्ण हस्तांतरण सुनिश्चित करना था।
माउंटबेटन योजना:
3 जून 1947 को प्रस्तुत की गई योजना भारत और पाकिस्तान के विभाजन का आधार बनी।
उन्होंने विभाजन की प्रक्रिया को तेज करते हुए 15 अगस्त 1947 को सत्ता हस्तांतरण की तारीख तय की।
स्वतंत्रता और विभाजन का कार्य:
15 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान दो स्वतंत्र राष्ट्र बने।
माउंटबेटन स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर-जनरल बने और 1948 तक इस पद पर रहे।
विभाजन के दौरान हुई सांप्रदायिक हिंसा और विस्थापन ने उनके कार्यकाल को चुनौतीपूर्ण बना दिया।
स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर-जनरल:
माउंटबेटन ने भारतीय नेताओं के साथ मिलकर नई प्रशासनिक संरचना स्थापित की।
उन्होंने देशी रियासतों के भारत या पाकिस्तान में विलय की प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
व्यक्तिगत जीवन
विवाह: 1922 में एडविना एशले से विवाह किया।
उनकी पत्नी एडविना भी सामाजिक कार्यों और मानवाधिकार के लिए प्रसिद्ध थीं।
माउंटबेटन के दो बेटियां थीं: पेट्रिशिया और पामेला।
सेवानिवृत्ति और बाद का जीवन:
माउंटबेटन ने 1948 में गवर्नर-जनरल के पद से इस्तीफा दिया।
इसके बाद उन्होंने ब्रिटिश नेवी में विभिन्न पदों पर कार्य किया।
1954 में उन्होंने रॉयल नेवी के फर्स्ट सी लॉर्ड (First Sea Lord) का पद संभाला।
वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति और कूटनीति के लिए भी कार्यरत रहे।
मृत्यु
27 अगस्त 1979 को आयरलैंड में माउंटबेटन की नाव पर एक बम विस्फोट हुआ। यह हमला आयरिश रिपब्लिकन आर्मी (IRA) द्वारा किया गया था।
इस हमले में उनकी मृत्यु हो गई।
लॉर्ड माउंटबेटन का योगदान
1. सकारात्मक पक्ष:
भारत में ब्रिटिश राज का शांतिपूर्ण अंत हुआ।
भारतीय नेताओं के साथ सामंजस्यपूर्ण संबंध बनाए।
द्वितीय विश्व युद्ध में उनके नेतृत्व को सराहा गया।
2. नकारात्मक पक्ष:
विभाजन के दौरान हुई हिंसा और मानवीय त्रासदी के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा।
विभाजन की प्रक्रिया में जल्दबाजी का आरोप।
निष्कर्ष
लॉर्ड लुइस माउंटबेटन एक कुशल प्रशासक, सैन्य अधिकारी और राजनयिक थे। भारत के स्वतंत्रता संग्राम के अंतिम चरण में उनकी भूमिका ऐतिहासिक थी। हालांकि, विभाजन के परिणा
मस्वरूप हुई हिंसा उनकी विरासत पर एक गहरा सवाल छोड़ जाती है। उनकी कूटनीतिक क्षमताएं और नेतृत्व के गुण उन्हें इतिहास में एक विशेष स्थान प्रदान करते हैं।

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