1. भारत में थियोसोफिकल सोसायटी का प्रचार:
ऐनी बेसेंट ने मद्रास (अब चेन्नई) के पास अडयार में थियोसोफिकल सोसायटी का मुख्यालय स्थापित किया।
उन्होंने भारतीय दर्शन, वेद, उपनिषद, और गीता का प्रचार-प्रसार किया और भारतीय संस्कृति को पुनर्जीवित करने में मदद की।
2. होम रूल आंदोलन:
ऐनी बेसेंट ने 1916 में होम रूल लीग की स्थापना की।
उन्होंने भारत में स्वशासन (Home Rule) की मांग को लेकर व्यापक प्रचार-प्रसार किया।
इस आंदोलन के माध्यम से भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को नई ऊर्जा मिली।
3. कांग्रेस में योगदान:
1917 में ऐनी बेसेंट भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष बनीं।
वह कांग्रेस अध्यक्ष बनने वाली पहली महिला थीं।
4. सामाजिक सुधार कार्य:
उन्होंने बाल विवाह, जाति व्यवस्था, और महिलाओं की अशिक्षा के खिलाफ आवाज उठाई।
उन्होंने महिला शिक्षा और अधिकारों के लिए काम किया।
5. शिक्षा के क्षेत्र में योगदान:
बनारस में सेंट्रल हिंदू कॉलेज की स्थापना पंडित मदन मोहन मालवीय ने की थी। उन्होंने डॉ. एनी बेसेंट जैसे महान हस्तियों के सहयोग से इस कॉलेज को स्थापित किया था। बाद में इसी कॉलेज के आधार पर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना हुई।
कुछ महत्वपूर्ण बातें:
* साल: 1898 में सेंट्रल हिंदू कॉलेज की स्थापना हुई थी।
* मकसद: भारतीय संस्कृति और शिक्षा को बढ़ावा देना।
* विशेषता: यह कॉलेज बनारस हिंदू विश्व,*विद्यालय का आधार बना।
पंडित मदन मोहन मालवीय को इस विश्वविद्यालय का संस्थापक माना जाता है। उन्होंने इस विश्वविद्यालय को एक आवासीय विश्वविद्यालय के रूप में कल्पना की थी, जो कि संपूर्ण चरित्र विकास और छात्रों के संपूर्ण मार्गदर्शन के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए किया गया था।
डॉ. एनी बेसेंट ने भी इस विश्वविद्यालय की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने इस विश्वविद्यालय को भारत विश्वविद्यालय के रूप में माना।
6. प्रकाशन और लेखन ऐनी बेसेंट ने कई पत्रिकाओं का संपादन किया, जैसे:
"New India", जिसमें स्वतंत्रता और सामाजिक सुधारों के मुद्दे उठाए गए।
उन्होंने भारतीय संस्कृति और इतिहास पर कई लेख और पुस्तकें लिखीं।
7. भारतीय समाज में आत्मगौरव जगाना:
ऐनी बेसेंट ने भारतीयों को उनकी संस्कृति, परंपराओं और इतिहास पर गर्व करने की प्रेरणा दी। उन्होंने भारतीय धर्म और दर्शन को पश्चिमी दुनिया में भी लोकप्रिय बनाया।
8. अडयार में थियोसोफिकल सोसाइटी का विकास:
उन्होंने थियोसोफिकल सोसाइटी के माध्यम से वैश्विक भाईचारे और मानवता की एकता का संदेश फैलाया।
ऐनी बेसेंट का योगदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और समाज सुधार के क्षेत्र में अविस्मरणीय है। उन्होंने भारतीय समाज को जागृत करने और आत्मनिर्भर बनने में बड़ी भूमिका निभाई।
ऐनी बेसेंट का जीवन परिचय
ऐनी बेसेंट (Annie Besant) एक आयरिश मूल की समाज सुधारक, लेखिका, स्वतंत्रता सेनानी, और थियोसोफिस्ट थीं। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और भारतीय संस्कृति, शिक्षा, और समाज सुधार के लिए काम किया।
प्रारंभिक जीवन
जन्म: 1 अक्टूबर 1847, लंदन, इंग्लैंड।
माता-पिता:
पिता: विलियम वुड (डॉक्टर)।
माता: एमिली मॉरिसन।
ऐनी का बचपन मुश्किलों में बीता। उनके पिता का निधन उनके बचपन में ही हो गया, जिसके बाद उनकी मां ने उन्हें एक पारिवारिक मित्र के संरक्षण में भेज दिया।
शिक्षा और प्रारंभिक जीवन:
ऐनी को शुरू से ही पढ़ाई और लेखन में रुचि थी।
उनका विवाह 1867 में फ्रैंक बेसेंट से हुआ, लेकिन वैचारिक मतभेदों के कारण 1873 में वे अलग हो गए।
धार्मिक और सामाजिक यात्रा
1. ईसाई धर्म से नास्तिकता तक:
ऐनी ने चर्च के रीति-रिवाजों और मान्यताओं पर सवाल उठाना शुरू किया।
उन्होंने नास्तिकता और तर्कवाद को अपनाया और अपने विचारों को प्रसारित करने के लिए लेखन और भाषण का सहारा लिया।
2. थियोसोफिकल सोसायटी से जुड़ाव:
1889 में ऐनी थियोसोफिकल सोसायटी से जुड़ीं।
इस संस्था ने भारतीय दर्शन, वेदों, और गीता के अध्ययन को बढ़ावा दिया।
थियोसोफिकल सोसायटी के माध्यम से उन्होंने भारतीय आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक विरासत का प्रचार-प्रसार किया।
1907 में ऐनी बेसेंट थियोसोफिकल सोसायटी की अध्यक्ष बनीं।
भारत आगमन और योगदान:
ऐनी बेसेंट 1893 में भारत आईं और यहां के सामाजिक, सांस्कृतिक, और राजनीतिक जीवन से गहराई से जुड़ गईं।
1. भारतीय संस्कृति और शिक्षा के लिए कार्य:
ऐनी ने भारतीय संस्कृति, परंपराओं, और धर्म का प्रचार-प्रसार किया।
1898 में उन्होंने बनारस में सेंट्रल हिंदू कॉलेज की स्थापना की, जो बाद में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) का हिस्सा बना।
उन्होंने भारतीय युवाओं को आधुनिक शिक्षा और राष्ट्रीयता की भावना से जोड़ने पर जोर दिया।
2. समाज सुधार कार्य:
ऐनी बेसेंट ने महिला शिक्षा, जाति प्रथा के उन्मूलन, और बाल विवाह जैसे मुद्दों पर काम किया।
उन्होंने महिलाओं के अधिकारों और सामाजिक सुधारों के लिए आवाज उठाई।
3. भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में योगदान:
ऐनी बेसेंट ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई।
होम रूल आंदोलन (1916):
ऐनी ने बाल गंगाधर तिलक के साथ मिलकर होम रूल लीग की स्थापना की।
उन्होंने स्वशासन (होम रूल) की मांग को लेकर व्यापक प्रचार-प्रसार किया।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस:
1917 में ऐनी बेसेंट भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष बनीं।
वह इस पद पर चुनी जाने वाली पहली महिला थीं।
4. प्रकाशन और लेखन:
उन्होंने "New India" नामक पत्रिका का संपादन किया, जिसमें उन्होंने स्वतंत्रता, सामाजिक सुधार, और महिला अधिकारों के मुद्दों पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
उन्होंने भारतीय संस्कृति और धर्म पर कई पुस्तकें लिखीं।
प्रमुख विचार और योगदान
1. भारतीय संस्कृति का पुनर्जागरण:
ऐनी ने भारतीय परंपराओं और दर्शन में गहरी आस्था जताई।
उन्होंने भारतीयों को उनकी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत पर गर्व करना सिखाया।
2. सामाजिक सुधार:
महिलाओं की शिक्षा, अधिकारों और सामाजिक न्याय के लिए काम किया।
जातिवाद, बाल विवाह और धार्मिक अंधविश्वास के खिलाफ संघर्ष किया।
3. स्वतंत्रता संग्राम:
भारतीय स्वतंत्रता के लिए उनका संघर्ष और योगदान अतुलनीय है।
उन्होंने भारतीय नेताओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया।
मृत्यु
मृत्यु: 20 सितंबर 1933, अडयार, मद्रास (अब चेन्नई)।
ऐनी बेसेंट ने अपना अंतिम समय अडयार में थियोसोफिकल सोसायटी के मुख्यालय में बिताया।
निष्कर्ष:
ऐनी बेसेंट का जीवन सामाजिक सुधार, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम, और शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणा स्रोत है।
उन्होंने न केवल भारतीय संस्कृति और परंपराओं को पश्चिमी दुनिया में पहचान दिलाई, बल्कि भारतीय समाज को आत्मनिर्भर बनने और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने के लिए प्रेरित किया।
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भूमिका और उनके सुधार कार्य उन्हें भारत के इतिहास में एक सम्मानजनक स्थान प्रदान करते हैं।

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