दादाभाई नौरोजी के महत्वपूर्ण कार्य
दादाभाई नौरोजी (1825-1917) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेताओं में से एक थे। उन्हें "भारतीय राजनीति के पितामह" के रूप में जाना जाता है। उनके योगदान और कार्यों की सूची निम्नलिखित है:
भारत की राष्ट्रीय आय का सर्वप्रथम आकलन दादाभाई नौरोजी ने किया था। उन्होंने अपनी पुस्तक "पॉवर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया" (1876) में भारत की राष्ट्रीय आय का विश्लेषण किया और भारत की आर्थिक स्थिति पर प्रकाश डाला।
प्रमुख तथ्य:
1. दादाभाई नौरोजी का आकलन:
उन्होंने ब्रिटिश शासन के दौरान भारत की गरीबी और आर्थिक शोषण की जांच की। उनके आकलन के अनुसार, भारत की प्रति व्यक्ति वार्षिक आय लगभग 20 रुपये थी। यह विश्लेषण भारत में व्याप्त गरीबी और ब्रिटिश शासन द्वारा किए जा रहे आर्थिक शोषण को उजागर करता है।
2. आधुनिक दृष्टिकोण: हालांकि दादाभाई नौरोजी का आकलन सीमित डेटा और साधनों के आधार पर था, लेकिन यह पहला प्रयास था, जिसने भारत की अर्थव्यवस्था पर ध्यान केंद्रित किया। इसे बाद में विभिन्न अर्थशास्त्रियों ने और अधिक सटीकता से दोहराया। दादाभाई नौरोजी का यह कार्य भारत की आर्थिक जागरूकता और स्वतंत्रता संग्राम के लिए प्रेरणा का स्रोत बना।
3. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना और नेतृत्व दादाभाई नौरोजी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। वे 1886, 1893, और 1906 में कांग्रेस के अध्यक्ष बने।
4. आर्थिक शोषण का अध्ययन (Drain Theory)
नौरोजी ने अपनी पुस्तक "पॉवर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया" में ब्रिटिश शासन द्वारा भारत के आर्थिक शोषण (Drain of Wealth) की थ्योरी प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि कैसे ब्रिटिश भारत से धन निकालकर अपने देश में ले जाते थे।
5. ब्रिटिश संसद में प्रवेश दादाभाई नौरोजी पहले भारतीय थे, जो 1892 में ब्रिटिश संसद के सदस्य बने। उन्होंने भारतीयों के अधिकारों और स्वायत्तता के लिए ब्रिटिश संसद में आवाज उठाई।
6. स्वराज का विचार नौरोजी ने भारतीय स्वतंत्रता के लिए स्वराज (स्वशासन) की आवश्यकता पर बल दिया। सन् 1906 में उन्होंने कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में "स्वराज" शब्द का पहली बार उपयोग किया।
7. शिक्षा के क्षेत्र में योगदान उन्होंने शिक्षा के महत्व को समझते हुए 1845 में बंबई में ग्यानोपदेशक मंडली की स्थापना की। लंदन में ईस्ट इंडिया एसोसिएशन (1867) की स्थापना की, जो भारतीय छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए काम करती थी।
8. भारतीयों के अधिकारों की रक्षा उन्होंने भारतीयों के लिए समान अवसर, बेहतर नौकरियां, और शिक्षा में सुधार के लिए अभियान चलाया। भारतीय सिविल सेवा (ICS) परीक्षाओं में भारतीयों को शामिल करने के लिए ब्रिटिश सरकार पर दबाव डाला।
7. सामाजिक सुधार उन्होंने बाल विवाह, जाति व्यवस्था, और महिलाओं की स्थिति में सुधार के लिए काम किया। पारसी समुदाय में सुधार लाने के लिए भी वे सक्रिय रहे।
8. राजनीतिक जागरूकता का प्रसार नौरोजी ने ब्रिटिश सरकार के असली चरित्र को उजागर करने के लिए भारत और इंग्लैंड में भाषण दिए और लेख लिखे।
9. लेखन और प्रकाशन उन्होंने "ड्रेन ऑफ वेल्थ" और अन्य आर्थिक समस्याओं पर लेख लिखे। उनकी प्रमुख रचनाओं में "पॉवर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया" सबसे प्रसिद्ध है।
10. भारत के पहले राजनीतिक नेता दादाभाई नौरोजी भारत के उन पहले नेताओं में से एक थे, जिन्होंने भारतीय स्वतंत्रता के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता पैदा की। दादाभाई नौरोजी का योगदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में मील का पत्थर साबित हुआ। उनके विचार और कार्य भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के लिए प्रेरणा बने।

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें