भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नरों और उनके कार्यकाल के दौरान घटित महत्वपूर्ण घटनाओं की सूची निम्नलिखित है:
1. सर ओसबोर्न स्मिथ (1935–1937)
भारतीय रिजर्व बैंक के पहले गवर्नर।
रिजर्व बैंक की स्थापना (1 अप्रैल 1935)।
बैंक का प्रारंभिक मुख्यालय कोलकाता में स्थापित किया गया।
2. सर जेम्स ब्रेड टेलर (1937–1943)
बैंक का मुख्यालय कोलकाता से मुंबई स्थानांतरित (1937)।
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मुद्रास्फीति नियंत्रण।
3. सर सीडी देशमुख (1943–1949)
पहले भारतीय गवर्नर।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर द्वितीय विश्व युद्ध का प्रभाव।
1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद अर्थव्यवस्था को स्थिर करने का प्रयास।
4. सर बेनेगल रामा राव (1949–1957)
रिजर्व बैंक का राष्ट्रीयकरण (1 जनवरी 1949)।
पंचवर्षीय योजनाओं के लिए वित्तीय सहायता।
ग्रामीण ऋण और कृषि सुधारों पर जोर।
5. केजी अंबेगांवकर (1957)
कार्यकाल छोटा था, बड़ी घटनाएं नहीं।
6. एचवीआर अय्यंगर (1957–1962)
औद्योगिक और कृषि क्षेत्रों के लिए वित्तीय नीति।
भारतीय मुद्रा की स्थिरता पर ध्यान।
7. पीसी भट्टाचार्य (1962–1967)
मुद्रा का "द्विस्तरीय नियंत्रण" लागू।
कृषि क्षेत्र के लिए विशेष ऋण योजनाएं।
8. एलके झा (1967–1970)
सरकारी ऋण का प्रबंधन।
भारतीय रुपये का अवमूल्यन (1966)।
9. बीएन आढारकर (1970)
कार्यकाल छोटा, महत्वपूर्ण नीतियों का संचालन।
10. एस जगन्नाथन (1970–1975)
बैंकों का राष्ट्रीयकरण (1969)।
हरित क्रांति को समर्थन।
11. एनसी सेनगुप्ता (1975–1977)
आपातकाल के दौरान बैंकिंग सुधार।
12. डॉ. आईजी पटेल (1977–1982)
मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के प्रयास।
भारत की भुगतान संतुलन स्थिति का प्रबंधन।
13. डॉ. मनमोहन सिंह (1982–1985)
ग्रामीण विकास और NABARD की स्थापना।
औद्योगिक वित्तीय संस्थानों को सुदृढ़ किया।
14. ए.जी. नरसिम्हम (1985–1986)
बैंकों की स्वायत्तता और सुधार पर जोर।
15. आर.एन. मल्होत्रा (1985–1990)
बीमा क्षेत्र में सुधार।
बैंकिंग प्रणाली को और अधिक संरचित करना।
16. एस. वेंकटरामन (1990–1992)
भारतीय अर्थव्यवस्था का उदारीकरण।
विदेशी मुद्रा संकट से निपटने के उपाय।
17. सी. रंगराजन (1992–1997)
LPG (उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण) नीति का समर्थन।
भुगतान संतुलन सुधार।
18. बीमल जालान (1997–2003)
भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक आर्थिक संकट से बचाना।
रुपये को स्थिर रखना।
19. वाय.वी. रेड्डी (2003–2008)
भारतीय बैंकिंग क्षेत्र में सुधार।
वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखना।
20. डॉ. डी. सुब्बाराव (2008–2013)
2008 के वैश्विक वित्तीय संकट का प्रबंधन।
मौद्रिक नीति ढांचे में सुधार।
21. रघुराम राजन (2013–2016)
गैर-निष्पादित संपत्तियों (NPAs) की समस्या पर जोर।
मुद्रा बाजार सुधार।
"मेक इन इंडिया" और वित्तीय समावेशन में योगदान।
22. उर्जित पटेल (2016–2018)
विमुद्रीकरण (नोटबंदी) के बाद वित्तीय स्थिरता बनाए रखना।
मुद्रास्फीति लक्ष्य निर्धारण।
23. शक्तिकांत दास (2018–वर्तमान)
कोविड-19 महामारी के दौरान आर्थिक समर्थन।
डिजिटल भुगतान और UPI का विस्तार।
चंद्रयान-3 अभियान को आर्थिक सहायता।
केंद्रीय डिजिटल मुद्रा (CBDC) की शुरुआत।

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