मीर जाफर
यहाँ दिए गए नाम 18वीं शताब्दी के भारत में राजनीतिक परिवर्तनों और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के उदय के संदर्भ में बेहद महत्वपूर्ण हैं।
1. सिराजुद्दौला (नवाब बंगाल):
सिराजुद्दौला बंगाल के अंतिम स्वतंत्र नवाब थे।
उनका शासनकाल (1756-1757) छोटा था, लेकिन उन्होंने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के बढ़ते प्रभाव का विरोध किया।
प्लासी का युद्ध (1757) उनके शासन का महत्वपूर्ण मोड़ था, जिसमें मीर जाफर के विश्वासघात के कारण उनकी हार हुई।
यह युद्ध भारत में ब्रिटिश शासन के प्रारंभ का प्रतीक बना।
2. मीर जाफर:
मीर जाफर सिराजुद्दौला के सेना के कमांडर थे।
प्लासी के युद्ध में उन्होंने ब्रिटिशों का साथ देकर सिराजुद्दौला के खिलाफ साजिश की।
युद्ध के बाद मीर जाफर बंगाल के नवाब बने, लेकिन उनकी स्थिति ब्रिटिशों के कठपुतली शासक की थी।
उनकी भूमिका ने भारत में ब्रिटिश साम्राज्य को स्थापित करने में मदद की।
3. शुजाउद्दौला (अवध के नवाब):
शुजाउद्दौला अवध के नवाब थे और बक्सर के युद्ध (1764) में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने मीर कासिम (मीर जाफर के उत्तराधिकारी) और मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय के साथ मिलकर अंग्रेजों के खिलाफ गठबंधन किया।
हालांकि, बक्सर के युद्ध में उनकी हार हुई, जिससे ईस्ट इंडिया कंपनी का दबदबा और बढ़ा।
4. शाह आलम द्वितीय (मुगल सम्राट):
शाह आलम द्वितीय मुगल साम्राज्य के सम्राट थे।
उन्होंने बक्सर के युद्ध में शुजाउद्दौला और मीर कासिम का साथ दिया।
युद्ध में हार के बाद उन्हें अंग्रेजों के अधीनस्थ बनकर काम करना पड़ा।
इलाहाबाद संधि (1765) के माध्यम से उन्होंने दीवानी अधिकार (बंगाल, बिहार, और उड़ीसा पर राजस्व वसूलने का अधिकार) अंग्रेजों को सौंप दिए।

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