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5-11 मई 2025 करेंट अफेयर्स

C URRENT   A FFAIRS   Date - 05-11/05/2025 🙋यहाँ 5 मई से 11 मई 2025 तक के राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय करेंट अफेयर्स पर आधारित महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर प्रस्तुत किए गए हैं, जो MPPSC, UPPSC, बैंकिंग, रेलवे, SSC आदि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए उपयोगी हैं: ✍️ 🌐 अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रम प्रश्न : हाल ही में किस देश ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के खतरों पर अंतर्राष्ट्रीय कार्रवाई का आह्वान किया है? उत्तर : संयुक्त राष्ट्र (UN)। प्रश्न : 2025 में G7 शिखर सम्मेलन की मेजबानी कौन सा देश करेगा? उत्तर : इटली। प्रश्न : किस अंतर्राष्ट्रीय संगठन ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए विकासशील देशों को नई वित्तीय सहायता प्रदान करने की घोषणा की है? उत्तर : विश्व बैंक (World Bank)। प्रश्न : हाल ही में किन दो देशों ने संयुक्त रूप से अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए एक महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू करने की घोषणा की है? उत्तर : भारत और जापान। प्रश्न : किस देश में हाल ही में आए शक्तिशाली भूकंप के कारण भारी जान-माल का नुकसान हुआ है? उत्तर : इंडोनेशिया। 🇮🇳 राष्ट्रीय घटनाक्रम प्रश...

भारत का भूगोल

भारत का भूगोल  यहाँ भारत की विविधता और सभी राज्यों में आयोजित होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं के महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न-उत्तर दिए गए हैं, जो आपकी सफलता की राह में मील का पत्थर साबित होंगे। हमें पूर्ण विश्वास है कि ये मॉक टेस्ट आपको आपकी मंज़िल तक पहुँचाने में सहायक सिद्ध होगी। आपके उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ, नमस्कार!  मॉक टेस्ट - 3 मॉक टेस्ट - 2 मॉक टेस्ट - 1

सरोजिनी नायडू

  भारत में सरोजिनी नायडू को "भारत कोकिला" (The Nightingale of India) के नाम से जाना जाता है। यह नाम उन्हें उनकी काव्य प्रतिभा और उनकी प्रभावशाली वाणी के कारण दिया गया था। वे भारत की स्वतंत्रता संग्राम की एक प्रमुख नेता, कवयित्री और समाज सुधारक थीं। सरोजिनी नायडू के प्रमुख कार्य और योगदान: 1. स्वतंत्रता संग्राम में योगदान : वे भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल हुईं और महात्मा गांधी के नेतृत्व में स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया। उन्होंने 1916 में गांधीजी से मुलाकात की और असहयोग आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1930 में सविनय अवज्ञा आंदोलन (Civil Disobedience Movement) में भाग लिया और नमक सत्याग्रह में सक्रिय रहीं। 1942 के "भारत छोड़ो आंदोलन" में उन्होंने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ आवाज उठाई और जेल भी गईं। 2. प्रथम महिला राज्यपाल : 15 अगस्त 1947 को भारत के स्वतंत्र होने के बाद, सरोजिनी नायडू उत्तर प्रदेश की पहली महिला राज्यपाल बनीं। वे भारत की पहली महिला राज्यपाल थीं, जिन्होंने इस पद को संभालकर महिलाओं के लिए एक मिसाल कायम की। 3. भारतीय रा...

पूना पैक्ट (Poona Pact) भारतीय इतिहास में

पूना पैक्ट (Poona Pact) भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना थी, जो महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर के बीच 24 सितंबर 1932 को हुई। यह समझौता ब्रिटिश भारत में दलित समुदाय के राजनीतिक अधिकारों और सामाजिक न्याय के लिए महत्वपूर्ण था। इसे समझने के लिए हमें उस समय की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि को विस्तार से जानना होगा। पृष्ठभूमि: ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में जाति व्यवस्था और सामाजिक भेदभाव चरम पर था। दलित, जिन्हें उस समय "अस्पृश्य" कहा जाता था, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक शोषण का शिकार थे। डॉ. बी. आर. अंबेडकर ने दलितों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया और उनकी शिक्षा, सामाजिक स्थिति और राजनीतिक अधिकारों को बढ़ाने का प्रयास किया। 1930 के दशक में, जब भारत में स्वतंत्रता आंदोलन अपने चरम पर था, ब्रिटिश सरकार ने भारतीय समाज के विभिन्न वर्गों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के लिए "साम्प्रदायिक निर्णय" (Communal Award) की घोषणा की। इस निर्णय के तहत, दलित समुदाय को अलग निर्वाचन क्षेत्र (Separate Electorate) देने का प्रस्ताव था। इसका अर्थ था कि दलित केवल अपने समुदाय क...

स्वेज नहर और पनामा नहर

मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के दृष्टिकोण से स्वेज नहर और पनामा नहर का निर्माण और उनका ऐतिहासिक महत्व जानना उपयोगी है। इन दोनों नहरों ने विश्व व्यापार और समुद्री परिवहन को क्रांतिकारी रूप से बदल दिया। 1. स्वेज नहर निर्माण और समयावधि: शुरुआत: 25 अप्रैल 1859 पूर्णता: 17 नवंबर 1869 स्थान: मिस्र (भूमध्य सागर और लाल सागर को जोड़ती है) निर्माता: फ्रांसीसी इंजीनियर फर्डिनेंड डी लेसेप्स लंबाई: लगभग 193 किलोमीटर ऐतिहासिक महत्व: 1. भौगोलिक उपयोगिता: यूरोप और एशिया के बीच समुद्री मार्ग को 7,000 किलोमीटर तक कम किया 2. व्यापार में क्रांति: यूरोपीय देशों और भारत, चीन जैसे एशियाई देशों के बीच व्यापार सुगम हो गया। 3. राजनीतिक महत्व: ब्रिटिश साम्राज्य के लिए यह नहर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रही। 4. आधुनिक युग में भूमिका: यह नहर आज भी वैश्विक व्यापार के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है। 2. पनामा नहर निर्माण और समयावधि: शुरुआत: 1 जनवरी 1881 (फ्रांस द्वारा) रुकावट: फ्रांस को आर्थिक और इंजीनियरिंग कठिनाइयों के कारण परियोजना छोड़नी पड़ी। पुनः निर्माण: 1904 में अमेरिका द...

भारत में अंग्रेजों के शासनकाल के दौरान कई प्रमुख कानून (एक्ट)

भारत में अंग्रेजों के शासनकाल के दौरान कई प्रमुख कानून (एक्ट) पारित किए गए, जो प्रशासन, सामाजिक सुधार, और राजनीति को प्रभावित करते थे। ये एक्ट ब्रिटिश शासन के उद्देश्यों और भारतीय समाज पर उनके प्रभाव को समझने में मदद करते हैं। निम्नलिखित में प्रमुख एक्ट्स का विस्तृत विवरण दिया गया है: 1. रेग्युलेटिंग एक्ट, 1773 (Regulating Act) उद्देश्य: ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रशासन में सुधार करना और ब्रिटिश संसद का नियंत्रण स्थापित करना। मुख्य प्रावधान: बंगाल के गवर्नर को गवर्नर-जनरल का दर्जा दिया गया। मद्रास और बॉम्बे की प्रेसिडेंसियों को गवर्नर-जनरल के अधीन कर दिया गया। कलकत्ता में सुप्रीम कोर्ट की स्थापना की गई। प्रभाव: यह पहला कानून था, जिसने ब्रिटिश सरकार को ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रशासन में हस्तक्षेप करने का अधिकार दिया। 2. पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 (Pitt's India Act) उद्देश्य: कंपनी के व्यापारिक और प्रशासनिक कार्यों को अलग करना और नियंत्रण को सुदृढ़ बनाना। मुख्य प्रावधान: एक नया बोर्ड ऑफ कंट्रोल बनाया गया, जो ब्रिटिश सरकार के अधीन था। कंपनी के प्रशासन में सरकार का नियंत्रण बढ़ा। प्रभाव: कंपनी ...

भारत की राजधानी दिल्ली का इतिहास

भारत की राजधानी दिल्ली का इतिहास लगभग 3000 वर्षों से अधिक पुराना है। यह शहर अनेक सभ्यताओं, संस्कृतियों, और साम्राज्यों का साक्षी रहा है। इसका इतिहास पौराणिक कथाओं से लेकर आधुनिक युग तक फैला हुआ है। पौराणिक युग 1. इंद्रप्रस्थ: महाभारत के अनुसार, दिल्ली का प्राचीन नाम इंद्रप्रस्थ था। इसे पांडवों ने बसाया था। यह यमुना नदी के किनारे स्थित था और हस्तिनापुर के बाद पांडवों की राजधानी बना। इंद्रप्रस्थ को एक समृद्ध और उन्नत नगर के रूप में वर्णित किया गया है। प्राचीन और मध्यकालीन दिल्ली 2. मौर्य और गुप्त साम्राज्य: मौर्य साम्राज्य के दौरान दिल्ली का महत्व बढ़ा। गुप्त काल में यह व्यापार और शिक्षा का केंद्र बना। दिल्ली का उल्लेख "योगिनीपुरा" के रूप में मिलता है। 3. राजपूत युग (736 ई.): तोमर राजाओं ने दिल्ली के आसपास बसावट की। राजा अनंगपाल तोमर ने 11वीं सदी में लाल कोट किले का निर्माण किया। 12वीं सदी में चौहान वंश ने इसे अपने अधीन कर लिया। पृथ्वीराज चौहान ने दिल्ली को अपना प्रमुख केंद्र बनाया। मध्यकालीन दिल्ली: दिल्ली सल्तनत 4. कुतुबुद्दीन ऐबक (1206): कुतुबुद्दीन ऐबक ने दिल्ली सल्तनत की स...