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सरोजिनी नायडू

 

भारत में सरोजिनी नायडू को "भारत कोकिला" (The Nightingale of India) के नाम से जाना जाता है। यह नाम उन्हें उनकी काव्य प्रतिभा और उनकी प्रभावशाली वाणी के कारण दिया गया था। वे भारत की स्वतंत्रता संग्राम की एक प्रमुख नेता, कवयित्री और समाज सुधारक थीं।

सरोजिनी नायडू के प्रमुख कार्य और योगदान:

1. स्वतंत्रता संग्राम में योगदान:

  • वे भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल हुईं और महात्मा गांधी के नेतृत्व में स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया।
  • उन्होंने 1916 में गांधीजी से मुलाकात की और असहयोग आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • 1930 में सविनय अवज्ञा आंदोलन (Civil Disobedience Movement) में भाग लिया और नमक सत्याग्रह में सक्रिय रहीं।
  • 1942 के "भारत छोड़ो आंदोलन" में उन्होंने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ आवाज उठाई और जेल भी गईं।

2. प्रथम महिला राज्यपाल:

  • 15 अगस्त 1947 को भारत के स्वतंत्र होने के बाद, सरोजिनी नायडू उत्तर प्रदेश की पहली महिला राज्यपाल बनीं।
  • वे भारत की पहली महिला राज्यपाल थीं, जिन्होंने इस पद को संभालकर महिलाओं के लिए एक मिसाल कायम की।

3. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में भूमिका:

  • 1925 में, वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष बनीं। यह उनकी नेतृत्व क्षमता और महिलाओं के अधिकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

4. काव्य और साहित्य:

  • सरोजिनी नायडू एक उत्कृष्ट कवयित्री थीं और उनकी कविताएं भारतीय संस्कृति, प्रकृति और देशभक्ति की भावनाओं को दर्शाती हैं।
  • उनकी प्रमुख काव्य रचनाएं हैं:
    • The Golden Threshold (1905)
    • The Bird of Time (1912)
    • The Broken Wing (1917)
  • उनकी कविताओं ने उन्हें "भारत कोकिला" की उपाधि दिलाई।

5. महिलाओं के अधिकारों की वकालत:

  • सरोजिनी नायडू ने महिलाओं की शिक्षा, समानता और स्वतंत्रता के लिए हमेशा आवाज उठाई।
  • 1917 में उन्होंने महिला भारतीय संघ (Women’s Indian Association) की स्थापना में मदद की।
  • उन्होंने समाज में महिलाओं की भूमिका को बढ़ाने के लिए कई आंदोलन चलाए और उन्हें राजनीति में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।

6. समाज सुधार:

  • उन्होंने जाति व्यवस्था, छुआछूत और अन्य सामाजिक कुरीतियों का विरोध किया।
  • महिलाओं को शिक्षा और रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए संघर्ष किया।

7. अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधित्व:

  • उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। 1919 में, उन्होंने लंदन में ईस्ट इंडिया एसोसिएशन की बैठक में हिस्सा लिया।
  • 1928 में, उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका में भारत की आजादी के लिए समर्थन जुटाने का प्रयास किया।

सरोजिनी नायडू का प्रभाव:

सरोजिनी नायडू ने न केवल स्वतंत्रता संग्राम में योगदान दिया बल्कि भारत में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए भी महत्वपूर्ण कार्य किया। उनकी कविताओं और भाषणों ने लाखों भारतीयों को प्रेरित किया। वे एक ऐसी महिला थीं, जिन्होंने अपने जीवन को देश और समाज की सेवा के लिए समर्पित किया। उनकी कृतियों और विचारों का प्रभाव आज भी महसूस किया जाता है।

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