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भारत की राजधानी दिल्ली का इतिहास

भारत की राजधानी दिल्ली का इतिहास लगभग 3000 वर्षों से अधिक पुराना है। यह शहर अनेक सभ्यताओं, संस्कृतियों, और साम्राज्यों का साक्षी रहा है। इसका इतिहास पौराणिक कथाओं से लेकर आधुनिक युग तक फैला हुआ है।

पौराणिक युग

1. इंद्रप्रस्थ:

महाभारत के अनुसार, दिल्ली का प्राचीन नाम इंद्रप्रस्थ था। इसे पांडवों ने बसाया था।

यह यमुना नदी के किनारे स्थित था और हस्तिनापुर के बाद पांडवों की राजधानी बना।

इंद्रप्रस्थ को एक समृद्ध और उन्नत नगर के रूप में वर्णित किया गया है।

प्राचीन और मध्यकालीन दिल्ली

2. मौर्य और गुप्त साम्राज्य:

मौर्य साम्राज्य के दौरान दिल्ली का महत्व बढ़ा।

गुप्त काल में यह व्यापार और शिक्षा का केंद्र बना।

दिल्ली का उल्लेख "योगिनीपुरा" के रूप में मिलता है।

3. राजपूत युग (736 ई.):

तोमर राजाओं ने दिल्ली के आसपास बसावट की। राजा अनंगपाल तोमर ने 11वीं सदी में लाल कोट किले का निर्माण किया।

12वीं सदी में चौहान वंश ने इसे अपने अधीन कर लिया। पृथ्वीराज चौहान ने दिल्ली को अपना प्रमुख केंद्र बनाया।

मध्यकालीन दिल्ली: दिल्ली सल्तनत

4. कुतुबुद्दीन ऐबक (1206):

कुतुबुद्दीन ऐबक ने दिल्ली सल्तनत की स्थापना की और इसे राजधानी बनाया।

कुतुब मीनार और अढ़ाई दिन का झोपड़ा जैसे स्मारकों का निर्माण इसी काल में हुआ।

5. खिलजी और तुगलक वंश:

खिलजी वंश (1290-1320) ने दिल्ली को प्रशासन और संस्कृति का केंद्र बनाया।

तुगलक वंश ने तुगलकाबाद किले का निर्माण किया।

6. लोधी वंश (1451-1526):

लोधी वंश ने दिल्ली को एक मजबूत प्रशासनिक राजधानी के रूप में स्थापित किया।

सैयद और लोधी वंश के दौरान दिल्ली का शहरीकरण हुआ।

मुगल युग (1526-1857)

7. बाबर और हुमायूं:

1526 में पानीपत की पहली लड़ाई के बाद बाबर ने दिल्ली पर कब्जा किया।

हुमायूं ने दिल्ली को एक सांस्कृतिक और प्रशासनिक केंद्र बनाया।

8. शाहजहां और नई दिल्ली (1638):

शाहजहां ने 1638 में दिल्ली को अपनी राजधानी बनाया।

शाहजहां ने पुरानी दिल्ली में लाल किला और जामा मस्जिद का निर्माण किया।

इस क्षेत्र को "शाहजहानाबाद" कहा गया।

ब्रिटिश काल (1857-1947)

9. 1857 का विद्रोह और ब्रिटिश नियंत्रण:

1857 के विद्रोह के बाद ब्रिटिश सरकार ने दिल्ली का नियंत्रण ले लिया।

1911 में ब्रिटिश सरकार ने कोलकाता से दिल्ली को अपनी राजधानी बनाया।

10. नई दिल्ली का निर्माण (1911-1931):

एडविन लुटियंस और हर्बर्ट बेकर ने नई दिल्ली को डिजाइन किया।

राष्ट्रपति भवन, इंडिया गेट, और संसद भवन जैसे भवन बनाए गए।

1931 में नई दिल्ली को औपचारिक रूप से भारत की राजधानी घोषित किया गया।

आधुनिक दिल्ली (1947 के बाद)

11. स्वतंत्र भारत की राजधानी:

1947 में भारत की आजादी के बाद, दिल्ली भारत की राजधानी बनी।

स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह राजनीतिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र रहा।

लाल किले से तिरंगा फहराना आजादी के प्रतीक के रूप में मान्यता प्राप्त है।

12. विकास और शहरीकरण:

आजादी के बाद दिल्ली ने तेजी से औद्योगिक और आर्थिक विकास देखा।

यह राजनीतिक, सांस्कृतिक, और शैक्षिक गतिविधियों का केंद्र बना।

दिल्ली मेट्रो, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, और अंतरराष्ट्रीय महत्व के स्थलों ने इसे वैश्विक शहर बना दिया।

दिल्ली का ऐतिहासिक महत्व

1. सांस्कृतिक केंद्र:

दिल्ली ने विभिन्न धर्मों, भाषाओं, और संस्कृतियों का संगम देखा।

इसमें मुगल, राजपूत, और ब्रिटिश स्थापत्य कला के अद्भुत नमूने मिलते हैं।

2. आधुनिक राजनीतिक केंद्र:

भारत का संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट, और राष्ट्रपति भवन दिल्ली में स्थित हैं।

यह देश की राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र है।

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