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सरोजिनी नायडू

  भारत में सरोजिनी नायडू को "भारत कोकिला" (The Nightingale of India) के नाम से जाना जाता है। यह नाम उन्हें उनकी काव्य प्रतिभा और उनकी प्रभावशाली वाणी के कारण दिया गया था। वे भारत की स्वतंत्रता संग्राम की एक प्रमुख नेता, कवयित्री और समाज सुधारक थीं। सरोजिनी नायडू के प्रमुख कार्य और योगदान: 1. स्वतंत्रता संग्राम में योगदान : वे भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल हुईं और महात्मा गांधी के नेतृत्व में स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया। उन्होंने 1916 में गांधीजी से मुलाकात की और असहयोग आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1930 में सविनय अवज्ञा आंदोलन (Civil Disobedience Movement) में भाग लिया और नमक सत्याग्रह में सक्रिय रहीं। 1942 के "भारत छोड़ो आंदोलन" में उन्होंने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ आवाज उठाई और जेल भी गईं। 2. प्रथम महिला राज्यपाल : 15 अगस्त 1947 को भारत के स्वतंत्र होने के बाद, सरोजिनी नायडू उत्तर प्रदेश की पहली महिला राज्यपाल बनीं। वे भारत की पहली महिला राज्यपाल थीं, जिन्होंने इस पद को संभालकर महिलाओं के लिए एक मिसाल कायम की। 3. भारतीय रा...

पूना पैक्ट (Poona Pact) भारतीय इतिहास में

पूना पैक्ट (Poona Pact) भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना थी, जो महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव अंबेडकर के बीच 24 सितंबर 1932 को हुई। यह समझौता ब्रिटिश भारत में दलित समुदाय के राजनीतिक अधिकारों और सामाजिक न्याय के लिए महत्वपूर्ण था। इसे समझने के लिए हमें उस समय की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि को विस्तार से जानना होगा। पृष्ठभूमि: ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में जाति व्यवस्था और सामाजिक भेदभाव चरम पर था। दलित, जिन्हें उस समय "अस्पृश्य" कहा जाता था, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक शोषण का शिकार थे। डॉ. बी. आर. अंबेडकर ने दलितों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया और उनकी शिक्षा, सामाजिक स्थिति और राजनीतिक अधिकारों को बढ़ाने का प्रयास किया। 1930 के दशक में, जब भारत में स्वतंत्रता आंदोलन अपने चरम पर था, ब्रिटिश सरकार ने भारतीय समाज के विभिन्न वर्गों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के लिए "साम्प्रदायिक निर्णय" (Communal Award) की घोषणा की। इस निर्णय के तहत, दलित समुदाय को अलग निर्वाचन क्षेत्र (Separate Electorate) देने का प्रस्ताव था। इसका अर्थ था कि दलित केवल अपने समुदाय क...

स्वेज नहर और पनामा नहर

मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के दृष्टिकोण से स्वेज नहर और पनामा नहर का निर्माण और उनका ऐतिहासिक महत्व जानना उपयोगी है। इन दोनों नहरों ने विश्व व्यापार और समुद्री परिवहन को क्रांतिकारी रूप से बदल दिया। 1. स्वेज नहर निर्माण और समयावधि: शुरुआत: 25 अप्रैल 1859 पूर्णता: 17 नवंबर 1869 स्थान: मिस्र (भूमध्य सागर और लाल सागर को जोड़ती है) निर्माता: फ्रांसीसी इंजीनियर फर्डिनेंड डी लेसेप्स लंबाई: लगभग 193 किलोमीटर ऐतिहासिक महत्व: 1. भौगोलिक उपयोगिता: यूरोप और एशिया के बीच समुद्री मार्ग को 7,000 किलोमीटर तक कम किया 2. व्यापार में क्रांति: यूरोपीय देशों और भारत, चीन जैसे एशियाई देशों के बीच व्यापार सुगम हो गया। 3. राजनीतिक महत्व: ब्रिटिश साम्राज्य के लिए यह नहर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रही। 4. आधुनिक युग में भूमिका: यह नहर आज भी वैश्विक व्यापार के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है। 2. पनामा नहर निर्माण और समयावधि: शुरुआत: 1 जनवरी 1881 (फ्रांस द्वारा) रुकावट: फ्रांस को आर्थिक और इंजीनियरिंग कठिनाइयों के कारण परियोजना छोड़नी पड़ी। पुनः निर्माण: 1904 में अमेरिका द...

भारत में अंग्रेजों के शासनकाल के दौरान कई प्रमुख कानून (एक्ट)

भारत में अंग्रेजों के शासनकाल के दौरान कई प्रमुख कानून (एक्ट) पारित किए गए, जो प्रशासन, सामाजिक सुधार, और राजनीति को प्रभावित करते थे। ये एक्ट ब्रिटिश शासन के उद्देश्यों और भारतीय समाज पर उनके प्रभाव को समझने में मदद करते हैं। निम्नलिखित में प्रमुख एक्ट्स का विस्तृत विवरण दिया गया है: 1. रेग्युलेटिंग एक्ट, 1773 (Regulating Act) उद्देश्य: ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रशासन में सुधार करना और ब्रिटिश संसद का नियंत्रण स्थापित करना। मुख्य प्रावधान: बंगाल के गवर्नर को गवर्नर-जनरल का दर्जा दिया गया। मद्रास और बॉम्बे की प्रेसिडेंसियों को गवर्नर-जनरल के अधीन कर दिया गया। कलकत्ता में सुप्रीम कोर्ट की स्थापना की गई। प्रभाव: यह पहला कानून था, जिसने ब्रिटिश सरकार को ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रशासन में हस्तक्षेप करने का अधिकार दिया। 2. पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 (Pitt's India Act) उद्देश्य: कंपनी के व्यापारिक और प्रशासनिक कार्यों को अलग करना और नियंत्रण को सुदृढ़ बनाना। मुख्य प्रावधान: एक नया बोर्ड ऑफ कंट्रोल बनाया गया, जो ब्रिटिश सरकार के अधीन था। कंपनी के प्रशासन में सरकार का नियंत्रण बढ़ा। प्रभाव: कंपनी ...

भारत की राजधानी दिल्ली का इतिहास

भारत की राजधानी दिल्ली का इतिहास लगभग 3000 वर्षों से अधिक पुराना है। यह शहर अनेक सभ्यताओं, संस्कृतियों, और साम्राज्यों का साक्षी रहा है। इसका इतिहास पौराणिक कथाओं से लेकर आधुनिक युग तक फैला हुआ है। पौराणिक युग 1. इंद्रप्रस्थ: महाभारत के अनुसार, दिल्ली का प्राचीन नाम इंद्रप्रस्थ था। इसे पांडवों ने बसाया था। यह यमुना नदी के किनारे स्थित था और हस्तिनापुर के बाद पांडवों की राजधानी बना। इंद्रप्रस्थ को एक समृद्ध और उन्नत नगर के रूप में वर्णित किया गया है। प्राचीन और मध्यकालीन दिल्ली 2. मौर्य और गुप्त साम्राज्य: मौर्य साम्राज्य के दौरान दिल्ली का महत्व बढ़ा। गुप्त काल में यह व्यापार और शिक्षा का केंद्र बना। दिल्ली का उल्लेख "योगिनीपुरा" के रूप में मिलता है। 3. राजपूत युग (736 ई.): तोमर राजाओं ने दिल्ली के आसपास बसावट की। राजा अनंगपाल तोमर ने 11वीं सदी में लाल कोट किले का निर्माण किया। 12वीं सदी में चौहान वंश ने इसे अपने अधीन कर लिया। पृथ्वीराज चौहान ने दिल्ली को अपना प्रमुख केंद्र बनाया। मध्यकालीन दिल्ली: दिल्ली सल्तनत 4. कुतुबुद्दीन ऐबक (1206): कुतुबुद्दीन ऐबक ने दिल्ली सल्तनत की स...

भारत में अंग्रेज गवर्नर जनरल एवं वायसराय द्वारा प्रमुख प्रशासनिक सुधार...

भारत में अंग्रेज गवर्नर जनरल एवं वायसराय द्वारा प्रमुख प्रशासनिक सुधार... 1. भारत के पहले गवर्नर जनरल कौन थे? उत्तर: लॉर्ड विलियम बैंटिक भारत के पहले गवर्नर जनरल थे। उन्होंने 1828 से 1835 तक शासन किया। उनके प्रशासनिक सुधारों में सती प्रथा का उन्मूलन और अंग्रेजी शिक्षा का प्रोत्साहन शामिल था। उन्होंने भारत में आधुनिक प्रशासन की नींव रखी। 2. स्थायी बंदोबस्त (Permanent Settlement) की शुरुआत किसने की? उत्तर: लॉर्ड कार्नवालिस ने 1793 में स्थायी बंदोबस्त की शुरुआत की। इस व्यवस्था के तहत जमींदारों को राजस्व संग्रह की जिम्मेदारी सौंपी गई। इससे किसानों की स्थिति में सुधार नहीं हुआ, लेकिन जमींदारों को भूमि पर अधिकार मिला। 3. भारत सरकार अधिनियम, 1858 के तहत भारत का पहला वायसराय कौन बना? उत्तर: लॉर्ड कैनिंग भारत का पहला वायसराय बना। इस अधिनियम ने ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन को समाप्त कर भारत को सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन कर दिया। प्रशासन में सुधार और स्थिरता लाने का प्रयास किया गया। 4. डाक सेवा सुधार (Postal Reform) किसने किया? उत्तर: लॉर्ड डलहौजी ने 1854 में डाक सेवा में सुधार किया। उन्होंने एकीकृ...

"क्यों करें एमपीपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी"

"क्यों करें एमपीपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी" यह सवाल हर उस छात्र के मन में आता है जो मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) की परीक्षा के बारे में सोच रहा हो। यह प्रश्न केवल करियर की दिशा में सही कदम उठाने से जुड़ा नहीं है, बल्कि इसके जरिए समाज और राष्ट्र के प्रति योगदान देने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी मिलता है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं: 1. सरकारी सेवा में स्थायित्व और सम्मान : एमपीपीएससी के माध्यम से चयनित उम्मीदवार राज्य सरकार की विभिन्न प्रतिष्ठित सेवाओं में कार्य करते हैं। इन सेवाओं में स्थायित्व, नियमित वेतन, और अतिरिक्त भत्तों का प्रावधान होता है। सरकारी नौकरी न केवल आर्थिक स्थिरता प्रदान करती है, बल्कि समाज में एक सम्मानजनक स्थान भी देती है। 2. समाज और राष्ट्र के प्रति योगदान: सिविल सेवा अधिकारी समाज के विकास में सीधा योगदान देते हैं। वे नीतियों का क्रियान्वयन, प्रशासनिक सुधार, और जनकल्याण की योजनाओं को लागू करते हैं। इस भूमिका में रहते हुए, आप लाखों लोगों की जिंदगी बदलने का अवसर पाते हैं। 3. करियर ग्रोथ और अवसर: एमपीपीएससी के माध्यम से डीएसपी, तहसीलदार, सहा...