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"क्यों करें एमपीपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी"

"क्यों करें एमपीपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी" यह सवाल हर उस छात्र के मन में आता है जो मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) की परीक्षा के बारे में सोच रहा हो। यह प्रश्न केवल करियर की दिशा में सही कदम उठाने से जुड़ा नहीं है, बल्कि इसके जरिए समाज और राष्ट्र के प्रति योगदान देने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी मिलता है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं: 1. सरकारी सेवा में स्थायित्व और सम्मान : एमपीपीएससी के माध्यम से चयनित उम्मीदवार राज्य सरकार की विभिन्न प्रतिष्ठित सेवाओं में कार्य करते हैं। इन सेवाओं में स्थायित्व, नियमित वेतन, और अतिरिक्त भत्तों का प्रावधान होता है। सरकारी नौकरी न केवल आर्थिक स्थिरता प्रदान करती है, बल्कि समाज में एक सम्मानजनक स्थान भी देती है। 2. समाज और राष्ट्र के प्रति योगदान: सिविल सेवा अधिकारी समाज के विकास में सीधा योगदान देते हैं। वे नीतियों का क्रियान्वयन, प्रशासनिक सुधार, और जनकल्याण की योजनाओं को लागू करते हैं। इस भूमिका में रहते हुए, आप लाखों लोगों की जिंदगी बदलने का अवसर पाते हैं। 3. करियर ग्रोथ और अवसर: एमपीपीएससी के माध्यम से डीएसपी, तहसीलदार, सहा...

लॉर्ड लुइस माउंटबेटन (Lord Louis Mountbatten)

लॉर्ड लुइस माउंटबेटन (Lord Louis Mountbatten) भारत के अंतिम वायसराय और स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर-जनरल थे। उन्होंने भारत के इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके द्वारा किए गए प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं: 1. भारत का विभाजन: माउंटबेटन को भारत का अंतिम वायसराय नियुक्त किया गया था और उन्होंने 15 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान के विभाजन को अंजाम दिया। माउंटबेटन योजना (3 जून 1947) के तहत भारत और पाकिस्तान दो स्वतंत्र राष्ट्रों के रूप में स्थापित किए गए। विभाजन के दौरान उन्होंने हिंदू और मुस्लिम नेताओं से परामर्श करके शांतिपूर्ण विभाजन की कोशिश की, हालांकि विभाजन के बाद बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे हुए। 2. भारत को स्वतंत्रता दिलाने में भूमिका: उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 को लागू किया, जिसके तहत भारत और पाकिस्तान को स्वतंत्रता प्रदान की गई। उन्होंने ब्रिटिश सरकार से स्वतंत्रता की प्रक्रिया को तेज करने के लिए समर्थन प्राप्त किया। 3. पहले गवर्नर-जनरल के रूप में कार्य: माउंटबेटन स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर-जनरल बने (1947-1948)। उन्होंने प्रारंभिक प्रशासनिक और संवैधानिक चुन...

ऐनी बेसेंट (Annie Besant)

ऐनी बेसेंट (Annie Besant) ए क प्रमुख आयरिश महिला थीं, जिन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक सुधार में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके द्वारा भारत में किए गए कार्य निम्नलिखित हैं: 1. भारत में थियोसोफिकल सोसायटी का प्रचार: ऐनी बेसेंट ने मद्रास (अब चेन्नई) के पास अडयार में थियोसोफिकल सोसायटी का मुख्यालय स्थापित किया। उन्होंने भारतीय दर्शन, वेद, उपनिषद, और गीता का प्रचार-प्रसार किया और भारतीय संस्कृति को पुनर्जीवित करने में मदद की। 2. होम रूल आंदोलन: ऐनी बेसेंट ने 1916 में होम रूल लीग की स्थापना की। उन्होंने भारत में स्वशासन (Home Rule) की मांग को लेकर व्यापक प्रचार-प्रसार किया। इस आंदोलन के माध्यम से भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को नई ऊर्जा मिली। 3. कांग्रेस में योगदान: 1917 में ऐनी बेसेंट भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष बनीं। वह कांग्रेस अध्यक्ष बनने वाली पहली महिला थीं। 4. सामाजिक सुधार कार्य: उन्होंने बाल विवाह, जाति व्यवस्था, और महिलाओं की अशिक्षा के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने महिला शिक्षा और अधिकारों के लिए काम किया। 5. शिक्षा के क्षेत्र में योगदान: बनारस में सेंट्रल हिंदू कॉ...

दादाभाई नौरोजी के महत्वपूर्ण कार्य

दादाभाई नौरोजी के महत्वपूर्ण कार्य  दादाभाई नौरोजी (1825-1917) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेताओं में से एक थे। उन्हें "भारतीय राजनीति के पितामह" के रूप में जाना जाता है। उनके योगदान और कार्यों की सूची निम्नलिखित है: भारत की राष्ट्रीय आय का सर्वप्रथम आकलन दादाभाई नौरोजी ने किया था। उन्होंने अपनी पुस्तक "पॉवर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया" (1876) में भारत की राष्ट्रीय आय का विश्लेषण किया और भारत की आर्थिक स्थिति पर प्रकाश डाला। प्रमुख तथ्य: 1. दादाभाई नौरोजी का आकलन: उन्होंने ब्रिटिश शासन के दौरान भारत की गरीबी और आर्थिक शोषण की जांच की। उनके आकलन के अनुसार, भारत की प्रति व्यक्ति वार्षिक आय लगभग 20 रुपये थी। यह विश्लेषण भारत में व्याप्त गरीबी और ब्रिटिश शासन द्वारा किए जा रहे आर्थिक शोषण को उजागर करता है। 2. आधुनिक दृष्टिकोण: हालांकि दादाभाई नौरोजी का आकलन सीमित डेटा और साधनों के आधार पर था, लेकिन यह पहला प्रयास था, जिसने भारत की अर्थव्यवस्था पर ध्यान केंद्रित किया। इसे बाद में विभिन्न अर्थशास्त्रियों ने और अधिक सटीकता से दोहराया। दादाभाई नौरोजी का यह कार...

सिराजुद्दौला, मीर जाफर, शुजाउद्दौला, और शाह आलम द्वितीय

मीर जाफर यहाँ दिए गए नाम 18वीं शताब्दी के भारत में राजनीतिक परिवर्तनों और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के उदय के संदर्भ में बेहद महत्वपूर्ण हैं। 1. सिराजुद्दौला (नवाब बंगाल): सिराजुद्दौला बंगाल के अंतिम स्वतंत्र नवाब थे। उनका शासनकाल (1756-1757) छोटा था, लेकिन उन्होंने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के बढ़ते प्रभाव का विरोध किया। प्लासी का युद्ध (1757) उनके शासन का महत्वपूर्ण मोड़ था, जिसमें मीर जाफर के विश्वासघात के कारण उनकी हार हुई। यह युद्ध भारत में ब्रिटिश शासन के प्रारंभ का प्रतीक बना। 2. मीर जाफर: मीर जाफर सिराजुद्दौला के सेना के कमांडर थे। प्लासी के युद्ध में उन्होंने ब्रिटिशों का साथ देकर सिराजुद्दौला के खिलाफ साजिश की। युद्ध के बाद मीर जाफर बंगाल के नवाब बने, लेकिन उनकी स्थिति ब्रिटिशों के कठपुतली शासक की थी। उनकी भूमिका ने भारत में ब्रिटिश साम्राज्य को स्थापित करने में मदद की। 3. शुजाउद्दौला (अवध के नवाब): शुजाउद्दौला अवध के नवाब थे और बक्सर के युद्ध (1764) में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने मीर कासिम (मीर जाफर के उत्तराधिकारी) और मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय के साथ मिलकर अंग्र...

भारत की प्रमुख झीलें की सूची

भारत की प्रमुख झीलें और उनके स्थान की सूची निम्नलिखित है: मीठे पानी की झीलें: 1. डल झील - श्रीनगर, जम्मू और कश्मीर 2. वुलर झील - जम्मू और कश्मीर (भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील) 3. नैनी झील - नैनीताल, उत्तराखंड 4. भिमताल झील - नैनीताल, उत्तराखंड 5. लोकटक झील - मणिपुर (तैरते द्वीपों के लिए प्रसिद्ध) 6. छिल्का झील - ओडिशा (खारे पानी की झील, लेकिन पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण स्थान) खारे पानी की झीलें: 7. सांभर झील - राजस्थान (भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की झील) 8. चिल्का झील - ओडिशा (भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की लैगून झील) 9. पुलिकट झील - आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के बीच कृत्रिम झीलें: 10. गोविंद सागर झील - हिमाचल प्रदेश (भाखड़ा नांगल बांध पर बनी) 11. राणा प्रताप सागर झील - राजस्थान 12. जयसमंद झील (ढेबर झील) - राजस्थान (भारत की सबसे बड़ी कृत्रिम झील) 13. उदयसागर झील - राजस्थान 14. हुसैन सागर झील - हैदराबाद, तेलंगाना अनूठी झीलें: 15. लोनार झील - महाराष्ट्र (गड्ढा झील) 16. पांगोंग त्सो झील - लद्दाख (खारे पानी की झील, जो भारत और चीन के बीच स्थित है) 17. त्सो मोरीरी झील - लद्दाख ये झीलें ...

भारत के प्रमुख बंदरगाह

भारत के प्रमुख बंदरगाह और उनके स्थानों की सूची निम्नलिखित है: पश्चिमी तट पर स्थित प्रमुख बंदरगाह: 1. कांडला (देेेेेेेंदयाल पोर्ट) - गुजरात 2. मुंबई पोर्ट - महाराष्ट्र 3. नवी मुंबई (जेएनपीटी) - महाराष्ट्र 4. मंगळुरु (न्यू मंगलोर पोर्ट) - कर्नाटक 5. कोचीन पोर्ट - केरल 6. मोरमुगाओ पोर्ट - गोवा पूर्वी तट पर स्थित प्रमुख बंदरगाह: 7. कोलकाता पोर्ट (श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट) - पश्चिम बंगाल 8. हल्दिया पोर्ट - पश्चिम बंगाल 9. पारादीप पोर्ट - ओडिशा 10. विजाग पोर्ट (विशाखापत्तनम पोर्ट) - आंध्र प्रदेश 11. चेन्नई पोर्ट - तमिलनाडु 12. एन्नोर पोर्ट (कामराजर पोर्ट) - तमिलनाडु 13. तुतीकोरिन पोर्ट (वीओसी पोर्ट) - तमिलनाडु द्वीपों पर स्थित प्रमुख बंदरगाह: 14. पोर्ट ब्लेयर - अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह ये बंदरगाह भारत के व्यापार और नौवहन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।