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सिंधु जल समझौता – UPPSC/MPPSC दृष्टिकोण से
1. परिचय
सिंधु जल समझौता (Indus Waters Treaty) भारत और पाकिस्तान के बीच 19 सितम्बर 1960 को हुआ। यह जल के बंटवारे को लेकर किया गया ऐतिहासिक समझौता है। इस समझौते के माध्यम से सिंधु नदी प्रणाली की नदियों के जल का दोनों देशों के बीच शांतिपूर्ण और न्यायसंगत बंटवारा सुनिश्चित किया गया।
समझौते पर भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल अयूब खान ने हस्ताक्षर किए। विश्व बैंक ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई।
2. समझौते के प्रमुख प्रावधान
इस समझौते के अनुसार सिंधु नदी प्रणाली की 6 प्रमुख नदियों को दो भागों में बांटा गया। पूर्वी नदियों – रावी, व्यास और सतलुज – का अधिकार भारत को दिया गया। भारत इन नदियों के जल का पूरा उपयोग कर सकता है, जैसे सिंचाई, बिजली उत्पादन और घरेलू उपयोग के लिए।
पश्चिमी नदियों – सिंधु, झेलम और चिनाब – का अधिकांश अधिकार पाकिस्तान को दिया गया। हालांकि भारत इन नदियों के जल का सीमित उपयोग कर सकता है, जैसे रन-ऑफ-द-रिवर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट और सिंचाई के लिए कुछ मात्रा में पानी।
इसके अलावा, जल विवादों को सुलझाने के लिए स्थायी सिंधु आयोग (Permanent Indus Commission) की स्थापना की गई, जिसमें दोनों देशों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं और वार्षिक बैठक होती है।
3. समझौते का महत्व
यह समझौता दुनिया के सबसे सफल जल समझौतों में गिना जाता है। भारत और पाकिस्तान के बीच 1965, 1971 और 1999 में युद्ध हुए, लेकिन यह समझौता लगातार लागू रहा। इसने दोनों देशों के बीच जल के मुद्दे पर संवाद और सहयोग की परंपरा को बनाए रखा।
यह समझौता भारत की जल कूटनीति (Water Diplomacy) का उदाहरण भी माना जाता है, जहां सीमित संसाधनों के बावजूद शांति और सहयोग बनाए रखा गया।
4. आलोचना और चुनौतियां
पाकिस्तान का आरोप रहा है कि भारत पश्चिमी नदियों पर बांध बनाकर जल प्रवाह को प्रभावित करता है, जैसे कि बगलीहार और किशनगंगा परियोजनाओं के मामले में। दूसरी ओर, भारत के भीतर ऐसी आवाजें उठती रही हैं कि पाकिस्तान को मिलने वाले जल को सीमा पार आतंकवाद के जवाब में रोका जाए या इस समझौते की समीक्षा की जाए।
जलवायु परिवर्तन, बढ़ती आबादी और जल संसाधनों पर बढ़ते दबाव के कारण भविष्य में इस समझौते पर नए तरह की चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
5. परीक्षा उपयोगिता
UPPSC, MPPSC जैसी परीक्षाओं में इस समझौते से जुड़े प्रश्न मुख्यतः निम्न बिंदुओं पर पूछे जाते हैं:
- समझौते का वर्ष और हस्ताक्षरकर्ता
- नदी प्रणाली का बंटवारा
- स्थायी सिंधु आयोग की भूमिका
- समझौते का महत्व और आलोचना
- वर्तमान संदर्भ में इसकी प्रासंगिकता
संभावित प्रश्न उदाहरण:
- सिंधु जल समझौते के प्रमुख प्रावधानों का वर्णन कीजिए।
- भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौते का महत्व एवं वर्तमान में इसकी प्रासंगिकता स्पष्ट कीजिए।
- सिंधु जल समझौता भारत की जल कूटनीति का कैसा उदाहरण है?
निष्कर्ष
सिंधु जल समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच जल के न्यायसंगत बंटवारे और शांतिपूर्ण सहयोग का उदाहरण है। बदलते जलवायु और भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच इसकी उपयोगिता और चुनौतियों पर विचार करना आवश्यक है। यह समझौता क्षेत्रीय स्थिरता और कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने में सहायक रहा है।

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