भारत के प्रमुख पर्यावरण संरक्षण आंदोलन
1. चिपको आंदोलन (1973, उत्तराखंड)
स्थान: चमोली जिला (अब उत्तराखंड)
नेता: सुंदरलाल बहुगुणा, चंडी प्रसाद भट्ट, गौरा देवी
उद्देश्य: जंगलों की कटाई को रोकना और पर्यावरण की रक्षा करना
मुख्य तरीका: ग्रामीण पेड़ों से चिपककर लकड़हारों को रोकते थे।
महत्त्व: यह आंदोलन पूरे भारत में पर्यावरण चेतना का प्रतीक बन गया।
2. नर्मदा बचाओ आंदोलन (1985)
क्षेत्र: नर्मदा नदी घाटी (मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र)
नेता: मेधा पाटकर, बाबा आमटे
उद्देश्य: नर्मदा नदी पर बन रहे बड़े बांधों (जैसे – सरदार सरोवर) के कारण विस्थापित हो रहे लोगों के हक की रक्षा करना।
नारा: "नर्मदा बचाओ, जीवन बचाओ"
महत्त्व: यह आंदोलन पुनर्वास, मानवाधिकार और पर्यावरण तीनों पर केंद्रित रहा।
3. अप्पिको आंदोलन (1983, कर्नाटक)
स्थान: पश्चिमी घाट, उत्तर कन्नड़ जिला
नेता: पांडुरंग हेगड़े
प्रेरणा: चिपको आंदोलन
उद्देश्य: वनों की अवैध कटाई को रोकना
मुख्य तरीका: पेड़ों से चिपककर संरक्षण करना
महत्त्व: दक्षिण भारत में पर्यावरण संरक्षण का बड़ा प्रतीक बना।
4. साइलेंट वैली आंदोलन (केरल)
स्थान: पलक्कड़ जिला, केरल
उद्देश्य: साइलेंट वैली के वर्षावनों को एक जलविद्युत परियोजना से बचाना
परिणाम: केंद्र सरकार ने परियोजना रद्द की और 1980 में क्षेत्र को राष्ट्रीय उद्यान घोषित कर दिया।
महत्त्व: भारत में जैव विविधता की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम।
5. खेजड़ली/बिश्नोई आंदोलन (1730, राजस्थान)
स्थान: खेजड़ली गांव, जोधपुर
नेता: अमृता देवी बिश्नोई
घटना: राजा के आदेश पर सैनिक खेजड़ी पेड़ों को काटने आए। अमृता देवी सहित 363 बिश्नोई लोगों ने अपनी जान देकर पेड़ों की रक्षा की।
महत्त्व: यह विश्व का पहला वृक्ष रक्षक बलिदान आंदोलन माना जाता है।

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