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संविधान के प्रमुख अनुच्छेद

भारत के संविधान में विभिन्न अनुच्छेदों (Articles) के माध्यम से भारत की राजनीतिक, कानूनी, सामाजिक और आर्थिक संरचना को परिभाषित किया गया है। कुछ प्रमुख अनुच्छेद, जो संविधान की मूल भावना को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं, नीचे दिए गए हैं:

1. अनुच्छेद 1: भारत, अर्थात् भारत का संघ

भारत को "इंडिया" और "भारत" दोनों नामों से जाना जाएगा।

भारत राज्यों का एक संघ होगा, जिसमें विभिन्न राज्य और केंद्रशासित प्रदेश शामिल होंगे।

2. अनुच्छेद 12-35: मौलिक अधिकार (Fundamental Rights)

यह अनुच्छेद नागरिकों के बुनियादी अधिकारों की सुरक्षा करता है। मुख्य मौलिक अधिकार हैं:

अनुच्छेद 14: कानून के समक्ष समानता और विधि के समान संरक्षण का अधिकार।

अनुच्छेद 15: धर्म, जाति, लिंग, जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध।

अनुच्छेद 16: सरकारी नौकरियों में समान अवसर का अधिकार।

अनुच्छेद 19: भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, एकत्रित होने की स्वतंत्रता, संगठनों की स्वतंत्रता, निवास और स्थानांतरित होने की स्वतंत्रता।

अनुच्छेद 21: जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार।

अनुच्छेद 22: गिरफ्तारी और नजरबंदी से सुरक्षा।

अनुच्छेद 25-28: धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार।

अनुच्छेद 32: मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करने का अधिकार।

3. अनुच्छेद 36-51: राज्य के नीति निदेशक तत्व (Directive Principles of State Policy)

इन अनुच्छेदों में सामाजिक और आर्थिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए सरकार को दिशा-निर्देश दिए गए हैं।

ये मौलिक अधिकारों की तरह बाध्यकारी नहीं होते, लेकिन राज्य को नीतिगत फैसले लेते समय इन्हें ध्यान में रखना चाहिए।

जैसे: अनुच्छेद 39 में कहा गया है कि राज्य को नागरिकों के बीच धन और संसाधनों का उचित वितरण सुनिश्चित करना चाहिए।

4. अनुच्छेद 40: पंचायतों का संगठन

यह अनुच्छेद राज्य सरकार को पंचायतों के गठन का निर्देश देता है, ताकि ग्राम स्तर पर स्थानीय स्वशासन का विकास हो सके।

5. अनुच्छेद 44: समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code)

इस अनुच्छेद में यह सुझाव दिया गया है कि राज्य को भारत में समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करना चाहिए, ताकि सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून हो, चाहे उनका धर्म या जाति कुछ भी हो।

6. अनुच्छेद 51A: मौलिक कर्तव्य (Fundamental Duties)

इसमें नागरिकों के कर्तव्यों का उल्लेख है, जैसे कि संविधान का सम्मान करना, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्मान करना, पर्यावरण की रक्षा करना, और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करना।

7. अनुच्छेद 72: राष्ट्रपति के पास क्षमा करने का अधिकार

यह अनुच्छेद राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है कि वह किसी व्यक्ति की सजा को माफ कर सकते हैं, कम कर सकते हैं, या उसे पूरी तरह समाप्त कर सकते हैं।

8. अनुच्छेद 76: भारत के महान्यायवादी (Attorney General of India)

इसमें भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति और अधिकारों का उल्लेख है, जो केंद्र सरकार के कानूनी सलाहकार होते हैं।

9. अनुच्छेद 110: धन विधेयक (Money Bill)

यह अनुच्छेद धन विधेयकों की पहचान और संसद में उनकी प्रक्रिया से संबंधित है। धन विधेयक केवल लोकसभा में पेश किए जा सकते हैं और राज्यसभा इन पर केवल सिफारिशें कर सकती है।

10. अनुच्छेद 123: अध्यादेश बनाने की राष्ट्रपति की शक्ति

यह अनुच्छेद राष्ट्रपति को संसद के सत्र में न होने पर अध्यादेश (Ordinance) जारी करने का अधिकार देता है। ये अध्यादेश संसद द्वारा अनुमोदन के बिना भी अस्थायी कानून के रूप में कार्य करते हैं।

11. अनुच्छेद 143: राष्ट्रपति द्वारा सर्वोच्च न्यायालय से परामर्श

राष्ट्रपति को किसी भी कानूनी या तथ्यात्मक प्रश्न पर सर्वोच्च न्यायालय से सलाह लेने का अधिकार है।

12. अनुच्छेद 148: भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (Comptroller and Auditor General of India)

इसमें भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की नियुक्ति, शक्तियों, और कार्यों का उल्लेख है, जो सरकारी खर्च की ऑडिट करते हैं।

13. अनुच्छेद 352-360: आपातकालीन उपबंध (Emergency Provisions)

अनुच्छेद 352: राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा से संबंधित है।

अनुच्छेद 356: राज्य आपातकाल या राष्ट्रपति शासन से संबंधित है।

अनुच्छेद 360: वित्तीय आपातकाल से संबंधित है।

14. अनुच्छेद 368: संविधान में संशोधन (Amendment of the Constitution)

इस अनुच्छेद में संविधान संशोधन की प्रक्रिया बताई गई है, जिसमें संसद को संविधान में संशोधन करने का अधिकार दिया गया है, लेकिन कुछ विशेष संशोधन राज्य विधानसभाओं की सहमति से ही किए जा सकते हैं।

15. अनुच्छेद 370: जम्मू और कश्मीर के लिए विशेष प्रावधान

यह अनुच्छेद जम्मू और कश्मीर राज्य को विशेष स्वायत्तता प्रदान करता था, जिसे 2019 में समाप्त कर दिया गया है।

16. अनुच्छेद 395: संविधान के पहले लागू होने वाले कानूनों का निरसन

इसमें भारत के संविधान के लागू होने के साथ ही पहले मौजूद कानूनों और व्यवस्थाओं को समाप्त करने की व्यवस्था की गई है।


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