ग्रांड ट्रंक रोड: भारत का सबसे पुराना राजमार्ग
ग्रांड ट्रंक रोड दक्षिण एशिया के सबसे पुराने और सबसे लंबे मार्गों में से एक है। यह सदियों से भारतीय उपमहाद्वीप के पूर्वी और पश्चिमी भागों को जोड़ता रहा है।
इतिहास
प्राचीन काल: इस मार्ग का निर्माण चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल में शुरू हुआ था और इसे उत्तरापथ कहा जाता था। यह गंगा के किनारे बसे नगरों को पंजाब से जोड़ते हुए खैबर दर्रा पार करती हुई अफ़ग़ानिस्तान के केंद्र तक जाती थी।
मध्यकाल: शेरशाह सूरी ने 16वीं शताब्दी में इस मार्ग को पक्का करवाया, दूरी मापने के लिए जगह-जगह पत्थर लगवाए, छायादार पेड़ लगवाए, राहगीरों के लिए सरायें बनवाईं और चुंगी की व्यवस्था की। इसीलिए इसे 'सूर मार्ग' या 'सड़क-ए-आजम' भी कहा जाता था।
आधुनिक काल: गवर्नर जनरल ऑकलैण्ड ने इसका पुनर्निर्माण कराया और इसका नाम ग्रांड ट्रंक रोड रखा।
महत्व
व्यापार और संस्कृति: यह मार्ग व्यापार, संस्कृति और विचारों के आदान-प्रदान का प्रमुख केंद्र रहा है।
सैन्य रणनीति: इसका इस्तेमाल सैन्य अभियानों के लिए भी किया जाता था।
सांस्कृतिक एकता: इसने विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को आपस में जोड़ा और सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा दिया।
वर्तमान स्थिति
वर्तमान में, ग्रांड ट्रंक रोड भारत में अमृतसर से कोलकाता तक फैली हुई है। यह राष्ट्रीय राजमार्गों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और आज भी व्यापार और यातायात के लिए उपयोग किया जाता है।
रोचक तथ्य
इस मार्ग की कुल लंबाई लगभग 2500 किलोमीटर है।
इस मार्ग पर कई ऐतिहासिक स्थल स्थित हैं।
ग्रांड ट्रंक रोड को भारत का सबसे पुराना हाईवे माना जाता है।
निष्कर्ष: ग्रांड ट्रंक रोड भारत का इतिहास और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह सदियों से भारत के लोगों के जीवन का एक अभिन्न अंग रहा है।
क्या आप ग्रांड ट्रंक रोड के बारे में कुछ और जानना चाहते हैं?
ग्रैंड ट्रंक रोड या उत्तरापथ पर एक नजर डालें, तो इसकी शुरुआत शेरशाह ने की थी। इसे हम भारत का सिल्क रूट भी कहते हैं। हालांकि, ऐसा क्यो हैं और क्या है इसकी कहानी, जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
जीटी रोड
भारत का ग्रैंड ट्रंक रोड यानि GT Road प्राचीन इतिहास का एक प्रसिद्ध मार्ग है। हालांकि, इसके अवशेष अभी भी उपयोग में हैं। यह सड़क भारत के कई राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए एक प्रेरणा है।
इस मार्ग को उत्तरापथ भी कहा जाता था और यह प्राचीन भारतीय इतिहास के कई साम्राज्यों की प्रमुख विशेषता थी।
क्या था उत्तरापथ
यह मार्ग अफगानिस्तान के काबुल से शुरू होकर बांग्लादेश के चटगांव तक जाता था। इसने खैबर बाईपास को कवर किया और रावलपिंडी, अमृतसर, अटारी, दिल्ली, मथुरा, वाराणसी, पटना, कोलकाता, ढाका और चटगांव जैसे शहरों को जोड़ा।
यह 2500 किमी लंबा मार्ग था, जिसे प्राचीन काल में सड़क-ए-आजम, बादशाही सड़क या सड़क-ए-शेरशाह के नाम से जाना जाता था। बाद में अंग्रेजों ने इसका नाम बदलकर ग्रांड ट्रंक रोड रख दिया था।
सड़क अभी भी उपयोग में है और राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के रूप में है।
उदाहरण के तौर पर अटारी सीमा से जालंधर तक की सड़क को NH3 कहा जाता है। जालंधर से आगरा तक की सड़क को NH44 कहा जाता है, जबकि आगरा से कोलकाता तक इसे NH-19 कहा जाता है। यह राजमार्ग ग्रैंड ट्रंक रोड या सड़क-ए-शेर शाह के समान मार्ग है।
यह एशियाई राजमार्ग नेटवर्क का भी एक हिस्सा है, जिसे 1959 में टोक्यो को तुर्की और इस्तांबुल से जोड़ने का प्रस्ताव दिया गया था, जो अंततः यूरोपीय राजमार्ग नेटवर्क से मिलता है।
.jpeg)


.jpeg)
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें