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GS Booster Capsule - 3

Date - 12/10/2024



कक्षा 8वीं विषय सामाजिक विज्ञान 

सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन भाग - III

1. इकाई एक: भारतीय संविधान और धर्मनिरपेक्षता

अध्याय - 1.भारतीय संविधान

1. भारतीय संविधान कब लागू हुआ?

उत्तर - भारतीय संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ। इसे 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा अंगीकृत किया गया था। संविधान ने भारत को एक लोकतांत्रिक, गणराज्य और धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित किया।

2. संविधान सभा का गठन कब हुआ?

उत्तर - संविधान सभा का गठन 9 दिसंबर 1946 को हुआ। इसका उद्देश्य भारतीय संविधान का मसौदा तैयार करना था। इसमें 389 सदस्य थे, जो विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों का प्रतिनिधित्व करते थे।

3. संविधान सभा के अध्यक्ष कौन थे?

उत्तर - संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे। उन्होंने संविधान निर्माण प्रक्रिया का नेतृत्व किया और भारतीय गणराज्य के पहले राष्ट्रपति बने।

4. भारतीय संविधान की प्रस्तावना में किन मूल्यों का उल्लेख है?

उत्तर - संविधान की प्रस्तावना में न्याय, स्वतंत्रता, समानता, और बंधुत्व के मूल्यों का उल्लेख किया गया है। यह भारत को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में स्थापित करती है।

5. मौलिक अधिकार क्या हैं?

उत्तर - मौलिक अधिकार भारतीय संविधान के भाग III में वर्णित हैं। ये अधिकार नागरिकों को स्वतंत्रता, समानता, और न्याय प्रदान करते हैं, जैसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धार्मिक स्वतंत्रता, और जीवन का अधिकार।

6. संविधान में धर्मनिरपेक्षता का क्या अर्थ है?

उत्तर - धर्मनिरपेक्षता का अर्थ है कि भारत में राज्य का कोई धर्म नहीं होगा और राज्य सभी धर्मों के प्रति तटस्थ रहेगा। नागरिकों को किसी भी धर्म का पालन करने या न करने की स्वतंत्रता है।

7. भारतीय संविधान में संघीय ढांचे का क्या महत्व है?

उत्तर - संघीय ढांचे में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच शक्तियों का बंटवारा किया गया है। यह ढांचा भारत की विविधता को ध्यान में रखते हुए संतुलन बनाए रखने के लिए बनाया गया है।

8. भारतीय संविधान के नीति-निर्देशक तत्व क्या हैं?

उत्तर - नीति-निर्देशक तत्व भाग IV में वर्णित हैं। ये राज्य को लोक कल्याणकारी नीतियाँ अपनाने और सामाजिक, आर्थिक, और राजनीतिक न्याय को प्रोत्साहित करने के लिए मार्गदर्शन देते हैं।

9. अनुच्छेद 21 में कौन सा अधिकार दिया गया है?

उत्तर - अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है। इसके तहत, किसी भी व्यक्ति को उसकी स्वतंत्रता या जीवन से वंचित नहीं किया जा सकता, सिवाय कानूनी प्रक्रिया के।

10. भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्य कब जोड़े गए?

उत्तर - मौलिक कर्तव्यों को 42वें संविधान संशोधन (1976) के तहत संविधान में जोड़ा गया। अनुच्छेद 51A में 11 मौलिक कर्तव्यों का उल्लेख है, जो नागरिकों के राष्ट्र के प्रति दायित्वों को निर्धारित करते हैं।

11. संविधान के अनुसार न्यायपालिका की स्वतंत्रता का क्या महत्व है?

उत्तर - न्यायपालिका की स्वतंत्रता कानून की निष्पक्षता सुनिश्चित करती है। संविधान न्यायपालिका को कार्यपालिका और विधायिका से स्वतंत्र रखता है, जिससे यह संविधान और मौलिक अधिकारों की रक्षा कर सके।

12. संविधान संशोधन की प्रक्रिया क्या है?

उत्तर - संविधान संशोधन की प्रक्रिया अनुच्छेद 368 में वर्णित है। इसके अनुसार, संसद को संविधान संशोधन करने का अधिकार है। कुछ संशोधन साधारण बहुमत से और कुछ विशेष बहुमत से किए जाते हैं।

13. मूल अधिकारों की सुरक्षा कौन करता है?

उत्तर - सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय नागरिकों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा करते हैं। यदि किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकार का उल्लंघन होता है, तो वह न्यायालय में अपील कर सकता है।

14. संविधान में आपातकाल की व्यवस्था कौन से अनुच्छेद में है?

उत्तर - संविधान में तीन प्रकार के आपातकाल की व्यवस्था की गई है: राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352), राज्य आपातकाल (अनुच्छेद 356), और वित्तीय आपातकाल (अनुच्छेद 360)।

15. डॉ. भीमराव अंबेडकर का संविधान निर्माण में क्या योगदान है?

उत्तर - डॉ. भीमराव अंबेडकर संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे। उन्हें भारतीय संविधान का मुख्य शिल्पकार माना जाता है। उन्होंने सामाजिक न्याय और समानता के सिद्धांतों को संविधान में सम्मिलित किया।

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अध्याय - 2. धर्मनिरपेक्षता

1. धर्मनिरपेक्षता का क्या अर्थ है?

उत्तर - धर्मनिरपेक्षता का अर्थ है कि राज्य किसी भी धर्म को विशेष मान्यता नहीं देता और सभी धर्मों के प्रति तटस्थ रहता है। यह सिद्धांत धार्मिक स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है और नागरिकों को किसी भी धर्म का पालन करने या न करने का अधिकार देता है।

2. भारतीय संविधान में धर्मनिरपेक्षता का उल्लेख कहाँ है?

उत्तर - धर्मनिरपेक्षता भारतीय संविधान की प्रस्तावना में 42वें संशोधन (1976) के तहत जोड़ी गई थी। यह सुनिश्चित करता है कि राज्य का कोई धर्म नहीं होगा और सभी धर्मों को समान रूप से सम्मानित किया जाएगा।

3. धार्मिक स्वतंत्रता के कौन से अनुच्छेद में प्रावधान हैं?

उत्तर - अनुच्छेद 25 से 28 में धार्मिक स्वतंत्रता से संबंधित प्रावधान हैं। ये अनुच्छेद नागरिकों को अपने धर्म का पालन करने, प्रचार करने और धार्मिक विश्वासों को मानने की स्वतंत्रता प्रदान करते हैं।

4. सरला मुद्गल केस का क्या महत्व है?

उत्तर - सरला मुद्गल केस (1995) में सर्वोच्च न्यायालय ने यह निर्णय दिया कि धर्म बदलने के बावजूद कोई व्यक्ति एक से अधिक विवाह नहीं कर सकता। यह फैसला धर्मनिरपेक्षता और समान कानून के सिद्धांत को बल देता है।

5. धर्मनिरपेक्षता का भारतीय समाज पर क्या प्रभाव है?

उत्तर - धर्मनिरपेक्षता भारतीय समाज में विविधता और सहिष्णुता को बढ़ावा देती है। यह सुनिश्चित करती है कि सभी धर्मों के लोग शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में रह सकें और धर्म के आधार पर भेदभाव न हो।

6. धर्मनिरपेक्षता और समान नागरिक संहिता में क्या संबंध है?

उत्तर - धर्मनिरपेक्षता समान नागरिक संहिता की नींव है, जिसका उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून स्थापित करना है, चाहे उनका धर्म कुछ भी हो। यह न्याय और समानता के सिद्धांतों को सुनिश्चित करता है।

7. भारत में धार्मिक स्वतंत्रता किस हद तक लागू होती है?

उत्तर - भारतीय संविधान के तहत धार्मिक स्वतंत्रता व्यक्तिगत विश्वास तक सीमित है, लेकिन यह सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के तहत सीमित की जा सकती है। राज्य किसी धर्म को बढ़ावा नहीं देता, लेकिन धार्मिक विश्वासों का सम्मान करता है।

8. अनुच्छेद 25 के तहत क्या प्रावधान हैं?

उत्तर - अनुच्छेद 25 सभी नागरिकों को किसी भी धर्म को मानने, पालन करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता प्रदान करता है। हालांकि, यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य के अधीन है।

9. अनुच्छेद 26 का क्या उद्देश्य है?

उत्तर - अनुच्छेद 26 धार्मिक संस्थाओं को अपने धार्मिक मामलों का स्वतंत्र रूप से प्रबंधन करने का अधिकार देता है। इसके तहत धार्मिक संगठनों को धार्मिक और धार्मिक संपत्ति के प्रबंधन का अधिकार प्राप्त है।

10. अनुच्छेद 27 के तहत क्या प्रावधान है?

उत्तर - अनुच्छेद 27 के अनुसार, कोई भी व्यक्ति किसी विशेष धर्म को बढ़ावा देने के लिए कर नहीं देगा। यह राज्य को किसी भी धर्म के प्रचार में आर्थिक सहायता प्रदान करने से रोकता है।

11. अनुच्छेद 28 के तहत कौन से प्रावधान हैं?

उत्तर - अनुच्छेद 28 सरकारी या राज्य द्वारा वित्तपोषित शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक शिक्षा देने पर रोक लगाता है। हालांकि, धार्मिक संस्थानों में धार्मिक शिक्षा दी जा सकती है।

12. समान नागरिक संहिता का क्या महत्व है?

उत्तर - समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून बनाना है, जो धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत को लागू करता है। यह लैंगिक समानता और व्यक्तिगत अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

13. धर्मनिरपेक्षता और भारतीय न्यायपालिका का क्या संबंध है?

उत्तर - भारतीय न्यायपालिका धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत को बरकरार रखती है और सुनिश्चित करती है कि राज्य किसी विशेष धर्म का पक्ष न ले। न्यायालय धर्मनिरपेक्षता के तहत सभी नागरिकों को समानता और न्याय प्रदान करने का काम करता है।

14. धर्मनिरपेक्षता के लिए संवैधानिक सुरक्षा क्या है?

उत्तर - भारतीय संविधान में धर्मनिरपेक्षता को मौलिक अधिकारों और संविधान के प्रस्तावना में दर्ज किया गया है। संविधान यह सुनिश्चित करता है कि राज्य किसी धर्म का समर्थन नहीं करेगा और नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता दी जाएगी।

15. धर्मनिरपेक्षता के क्या लाभ हैं?

उत्तर - धर्मनिरपेक्षता भारत की विविधता को बनाए रखने और धार्मिक संघर्षों को कम करने में मदद करती है। यह सभी धर्मों को समान दृष्टिकोण के साथ देखती है और नागरिकों के बीच धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा देती है।

अध्याय - 3. संसद तथा कानूनों का निर्माण

1. संसद क्या है?

उत्तर - संसद भारत की सर्वोच्च विधायी संस्था है, जिसमें दो सदन होते हैं: लोकसभा और राज्यसभा। इसका मुख्य कार्य कानून बनाना, नीतियां तय करना और सरकार के कामकाज पर निगरानी रखना है।

2. लोकसभा और राज्यसभा में क्या अंतर है?

उत्तर - लोकसभा निचला सदन है, जिसके सदस्य प्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं, जबकि राज्यसभा उच्च सदन है, जिसके सदस्य राज्यों के विधायकों द्वारा चुने जाते हैं। लोकसभा अधिक शक्तिशाली है, खासकर वित्तीय मामलों में।

3. कानून बनाने की प्रक्रिया क्या है?

उत्तर - कानून बनाने की प्रक्रिया में विधेयक को संसद में पेश किया जाता है। उस पर बहस और चर्चा के बाद दोनों सदनों में पारित किया जाता है और फिर राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद वह कानून बनता है।

4. विधेयक कितने प्रकार के होते हैं?

उत्तर - विधेयक तीन प्रकार के होते हैं: साधारण विधेयक, वित्त विधेयक, और संविधान संशोधन विधेयक। प्रत्येक विधेयक के पास होने की प्रक्रिया और आवश्यक बहुमत भिन्न-भिन्न होते हैं।

5. वित्त विधेयक क्या होता है?

उत्तर - वित्त विधेयक उस विधेयक को कहा जाता है जो कर, राजस्व और सार्वजनिक धन से संबंधित होता है। इसे केवल लोकसभा में पेश किया जाता है और राज्यसभा इसमें संशोधन नहीं कर सकती।

6. जनलोकपाल बिल का क्या महत्व था?

उत्तर - जनलोकपाल बिल का उद्देश्य भ्रष्टाचार से निपटने के लिए एक स्वतंत्र संस्था का गठन करना था। इस विधेयक ने कानून निर्माण में जनता की भागीदारी को रेखांकित किया और भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन को प्रेरित किया।

7. संसदीय समितियों का क्या कार्य होता है?

उत्तर - संसदीय समितियाँ विधेयकों की बारीकी से समीक्षा करती हैं और संसद को सिफारिशें देती हैं। ये समितियाँ विधेयक को विशेषज्ञ दृष्टिकोण से जांचती हैं, जिससे कानून निर्माण की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनती है।

8. लोकसभा के विशेषाधिकार क्या होते हैं?

उत्तर - लोकसभा के विशेषाधिकार वित्तीय विधेयकों पर अंतिम निर्णय लेना और अविश्वास प्रस्ताव पारित करने की शक्ति है, जिससे सरकार को सत्ता से हटाया जा सकता है।

9. राज्यसभा में स्थायी सदस्यता क्या होती है?

उत्तर - राज्यसभा एक स्थायी सदन है, जिसे भंग नहीं किया जा सकता। इसके सदस्य छह साल के लिए चुने जाते हैं और हर दो साल में एक तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त होते हैं।

10. राष्ट्रपति की विधेयक पारित करने में क्या भूमिका है?

उत्तर - संसद द्वारा पारित विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून बनता है। राष्ट्रपति विधेयक को स्वीकृति, अस्वीकृति या पुनर्विचार के लिए वापस भेज सकते है।

अध्याय - 4. न्यायपालिका

1. भारतीय न्यायपालिका क्या है?

उत्तर - भारतीय न्यायपालिका संविधान की व्याख्या और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करने वाली स्वतंत्र शाखा है। इसका प्रमुख अंग उच्चतम न्यायालय है, जो संविधान का संरक्षक है।

2. उच्चतम न्यायालय का क्या कार्य है?

उत्तर - उच्चतम न्यायालय भारत की सर्वोच्च अदालत है, जो संविधान की व्याख्या करती है, कानूनों की वैधता की समीक्षा करती है और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करती है।

3. न्यायिक पुनरावलोकन क्या है

उत्तर - न्यायिक पुनरावलोकन वह प्रक्रिया है, जिसके तहत न्यायपालिका यह देखती है कि संसद द्वारा पारित कानून संविधान के अनुरूप हैं या नहीं। यह न्यायपालिका को संवैधानिक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।

4. जनहित याचिका (PIL) क्या है?

उत्तर - जनहित याचिका वह कानूनी उपाय है जिसके माध्यम से कोई भी नागरिक, सामाजिक हित के मुद्दों पर अदालत में याचिका दाखिल कर सकता है। इसका उद्देश्य जनता के हितों की रक्षा करना है।

5. केशवानंद भारती केस का क्या महत्व है?

उत्तर - केशवानंद भारती केस (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने "संविधान की बुनियादी संरचना" सिद्धांत का प्रतिपादन किया। इसके अनुसार, संविधान का मूल ढांचा संसोधन द्वारा बदला नहीं जा सकता।

6. न्यायपालिका की स्वतंत्रता का क्या महत्व है?

उत्तर - न्यायपालिका की स्वतंत्रता यह सुनिश्चित करती है कि न्यायिक प्रक्रिया निष्पक्ष हो और राजनीतिक दबाव से मुक्त रहे। यह संविधान की रक्षा करती है और नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा करती है।

7. उच्च न्यायालयों की क्या भूमिका है?

उत्तर - उच्च न्यायालय राज्यों के न्यायिक मामलों की सर्वोच्च अदालतें हैं। वे संविधान की व्याख्या और राज्य कानूनों की वैधता की समीक्षा करते हैं, साथ ही नागरिकों के अधिकारों की रक्षा भी करते हैं।

8. मौलिक अधिकारों की सुरक्षा में न्यायपालिका की क्या भूमिका है?

उत्तर - न्यायपालिका संविधान के तहत नागरिकों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा करती है। यदि किसी नागरिक के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो वह उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर सकता है।

9 PIL के माध्यम से कौन-से मुद्दे उठाए जा सकते हैं?

उत्तर - PIL के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, भ्रष्टाचार, महिलाओं और बच्चों के अधिकार, और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर अदालत में याचिका दाखिल की जा सकती है। यह न्याय तक पहुंच के अवसर को बढ़ाता है।

10. न्यायिक सक्रियता का क्या अर्थ है?

उत्तर - न्यायिक सक्रियता का मतलब है कि न्यायालय अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर समाज और सरकार के सुधारों में सक्रिय भूमिका निभाए। न्यायालय अपने फैसलों के माध्यम से सामाजिक और राजनीतिक सुधारों को प्रेरित कर सकता है।

अध्याय - 5. हाशियाकरण की समझ

1. हाशियाकरण का क्या अर्थ है?

उत्तर - हाशियाकरण का अर्थ है समाज के किसी विशेष वर्ग को मुख्यधारा से बाहर रखना। यह जाति, वर्ग, लिंग, धर्म, या आर्थिक स्थिति के आधार पर हो सकता है, जिससे इस वर्ग को संसाधनों और अधिकारों से वंचित किया जाता है।

2. भारत में हाशियाकरण के कौन-कौन से प्रमुख कारण हैं?

उत्तर - भारत में हाशियाकरण के प्रमुख कारणों में जाति प्रथा, सामाजिक और आर्थिक असमानता, लिंगभेद, धार्मिक भेदभाव और शैक्षिक असमानता शामिल हैं। यह कमजोर वर्गों को मुख्यधारा से अलग कर देता है।

3. दलित समुदाय को किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है?

उत्तर - दलित समुदाय को सामाजिक बहिष्कार, भेदभाव, आर्थिक पिछड़ापन और शैक्षिक असमानता का सामना करना पड़ता है। यह समुदाय सामाजिक स्तर पर सबसे निचले पायदान पर होता है और उनके साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार किया जाता है।

4. अनुसूचित जाति और जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम का उद्देश्य क्या है?

उत्तर - इस अधिनियम का उद्देश्य दलित और आदिवासी समुदायों के खिलाफ अत्याचार और भेदभाव को रोकना है। यह कानून सामाजिक न्याय और समानता को सुनिश्चित करने के लिए विशेष सुरक्षा प्रदान करता है।

5. हाशियाकरण के प्रभाव क्या होते हैं?

उत्तर - हाशियाकरण से प्रभावित वर्गों को सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक अवसरों से वंचित रहना पड़ता है। इसके परिणामस्वरूप समाज में असमानता, गरीबी और अशिक्षा बढ़ती है, जिससे सामाजिक और आर्थिक विकास अवरुद्ध होता है।

6. अल्पसंख्यक समुदाय हाशियाकरण का शिकार क्यों होते हैं?

उत्तर - अल्पसंख्यक समुदाय धार्मिक और सांस्कृतिक भेदभाव के कारण हाशियाकरण का शिकार होते हैं। उन्हें संसाधनों और अवसरों तक समान पहुंच नहीं मिलती, जिससे वे समाज में पीछे रह जाते हैं।

7. जाति आधारित हाशियाकरण का प्रभाव क्या है?

उत्तर - जाति आधारित हाशियाकरण ने भारतीय समाज में गहरी असमानता पैदा की है। यह निचली जातियों को सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक विकास से दूर रखता है, जिससे वे गरीबी और उत्पीड़न के चक्र में फंस जाते हैं।

8. लिंग आधारित हाशियाकरण क्या है?

उत्तर - लिंग आधारित हाशियाकरण का अर्थ है महिलाओं को पुरुषों की तुलना में कमतर समझना और उन्हें सामाजिक, आर्थिक, और राजनीतिक अवसरों से वंचित करना। यह असमानता महिलाओं को समाज में कमजोर स्थिति में डालता है।

9. हाशियाकरण का आर्थिक प्रभाव क्या होता है?

उत्तर - हाशियाकरण से प्रभावित वर्गों को रोजगार, शिक्षा और आर्थिक अवसरों में भेदभाव का सामना करना पड़ता है। यह उनके आर्थिक विकास को बाधित करता है और समाज में गरीबी और असमानता को बढ़ाता है।

10. संविधान में हाशियाकरण से निपटने के लिए क्या प्रावधान हैं?

उत्तर - भारतीय संविधान में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए विशेष अधिकार और आरक्षण की व्यवस्था की गई है, ताकि उन्हें शिक्षा, रोजगार, और अन्य क्षेत्रों में समान अवसर मिल सकें।

अध्याय - 6. हाशियाकरण से निपटना

1. सकारात्मक भेदभाव क्या है?

उत्तर - सकारात्मक भेदभाव वह नीति है जिसके तहत समाज के कमजोर वर्गों को विशेष अधिकार, अवसर और आरक्षण प्रदान किए जाते हैं। इसका उद्देश्य उन्हें समान अवसर देना और हाशियाकरण से निपटना है।

2. आरक्षण नीति का उद्देश्य क्या है?

उत्तर - आरक्षण नीति का उद्देश्य अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों को शिक्षा, रोजगार, और सरकारी सेवाओं में समान अवसर प्रदान करना है, जिससे वे मुख्यधारा में शामिल हो सकें।

3. आर्थिक पिछड़ेपन से निपटने के लिए कौन से कदम उठाए गए हैं?

उत्तर - सरकार ने कमजोर वर्गों के लिए आर्थिक सहायता, विशेष योजनाएं, ऋण योजनाएं और रोजगार के अवसर प्रदान किए हैं, ताकि वे आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें और हाशियाकरण से बाहर आ सकें।

4. हाशियाकरण से निपटने के लिए शिक्षा का क्या महत्व है?

उत्तर - शिक्षा हाशियाकरण से निपटने का सबसे महत्वपूर्ण साधन है। इसके माध्यम से समाज के कमजोर वर्गों को जागरूकता, ज्ञान और अवसर मिलते हैं, जिससे वे सामाजिक और आर्थिक रूप से सक्षम हो पाते हैं।

5. सामाजिक न्याय में सरकार की क्या भूमिका है?

उत्तर- सरकार सामाजिक न्याय को सुनिश्चित करने के लिए नीतियां और कानून बनाती है, जैसे कि आरक्षण, विशेष योजनाएं, और सामाजिक सुरक्षा। यह समाज के हाशिए पर पड़े वर्गों को मुख्यधारा में लाने के लिए काम करती है।

6. अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षण का क्या महत्व है?

उत्तर - अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षण ने शिक्षा, रोजगार, और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में इन वर्गों को समान अवसर प्रदान किया है। इससे उनके सामाजिक और आर्थिक उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान मिला है।

7. नरेगा (मनरेगा) योजना का क्या उद्देश्य है?

उत्तर - महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार प्रदान करना है। यह योजना हाशिए पर पड़े वर्गों को रोजगार देकर उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार करती है।

8. दलितों के सामाजिक उत्थान के लिए कौन से कदम उठाए गए हैं?

उत्तर - सरकार ने दलितों के उत्थान के लिए शिक्षा, रोजगार और आर्थिक सहायता की योजनाएं चलाई हैं, जैसे कि अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए आरक्षण, छात्रवृत्ति योजनाएं और विशेष विकास कार्यक्रम।

9. महिलाओं के हाशियाकरण से निपटने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?

उत्तर - महिलाओं के लिए विशेष शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान की गई हैं। उनके लिए आरक्षण, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसी योजनाएं चलाई गई हैं, ताकि उन्हें समान अवसर और अधिकार मिल सकें।

10. सामाजिक न्याय की दिशा में NGO की क्या भूमिका है?

उत्तर - NGO (गैर सरकारी संगठन) समाज के कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा करते हैं और उनकी स्थिति को सुधारने में मदद करते हैं। वे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, और कानूनी सहायता प्रदान करके हाशियाकरण से निपटने में योगदान देते हैं।

अध्याय 7: जनसुविधाएं 

1. सरकार जनसुविधाएँ क्यों प्रदान करती है?

उत्तर - सरकार का दायित्व है कि वह अपने नागरिकों को बुनियादी सुविधाएँ, जैसे जल आपूर्ति, शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन, प्रदान करे ताकि नागरिकों का जीवन स्तर बेहतर हो सके और समाज में समृद्धि आ सके।

2. जनसुविधाओं का महत्व क्या है?

उत्तर - जनसुविधाएँ नागरिकों की बुनियादी आवश्यकताएँ पूरी करती हैं। ये सेवाएँ नागरिकों को सस्ती और सुलभ रूप में प्रदान कर समाज में आर्थिक और सामाजिक विकास सुनिश्चित करती हैं।

3. स्वच्छ भारत अभियान का क्या उद्देश्य है?

उत्तर - स्वच्छ भारत अभियान का उद्देश्य पूरे देश में स्वच्छता को बढ़ावा देना और खुले में शौच से मुक्त भारत का निर्माण करना है। इस अभियान के तहत शौचालय निर्माण, कचरा प्रबंधन और स्वच्छता जागरूकता पर जोर दिया जाता है।

4. प्रधानमंत्री जन धन योजना का क्या उद्देश्य है?

उत्तर - प्रधानमंत्री जन धन योजना का उद्देश्य गरीब और पिछड़े वर्ग के लोगों को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ना है, ताकि वे वित्तीय समावेशन का लाभ उठा सकें और आर्थिक सुरक्षा प्राप्त कर सकें।

5. सरकार द्वारा जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?

उत्तर - सरकार ने जल जीवन मिशन जैसी योजनाएं शुरू की हैं, जिसका उद्देश्य हर घर तक पाइप द्वारा पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करना है। इसके तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पेयजल की व्यवस्था की जाती है।

6. जनसुविधाओं में परिवहन का क्या महत्व है?

उत्तर - सस्ता और सुलभ परिवहन नागरिकों की गतिशीलता बढ़ाने और रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह आर्थिक विकास का एक महत्वपूर्ण आधार भी है।

7. स्वास्थ्य सेवाओं में सरकार की भूमिका क्या है?

उत्तर - सरकार का कार्य सभी नागरिकों के लिए सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करना है। इसके लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और आयुष्मान भारत जैसी योजनाएँ चलाई जाती हैं, जिससे गरीबों को मुफ्त इलाज की सुविधा मिलती है।

8. शिक्षा में सरकार की भूमिका क्या है?

उत्तर - सरकार की जिम्मेदारी है कि वह सभी बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराए। इसके लिए सरकार ने शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम लागू किया है और कई योजनाओं के तहत शिक्षा के स्तर को सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं।

9. सार्वजनिक सेवाओं के वितरण में सुधार के लिए कौन-सी योजनाएँ लागू की गई हैं?

उत्तर - सरकार ने विभिन्न योजनाएँ, जैसे डिजिटल इंडिया और उमंग ऐप, शुरू की हैं ताकि नागरिकों को सार्वजनिक सेवाओं तक डिजिटल पहुँच मिल सके और सेवाओं का वितरण पारदर्शी और प्रभावी हो।

10. जनसुविधाओं को सुलभ और सस्ती बनाने के लिए सरकार द्वारा क्या कदम उठाए गए हैं?

उत्तर - सरकार ने कई योजनाएँ लागू की हैं, जैसे उज्ज्वला योजना, जिसके तहत गरीब परिवारों को सस्ते दरों पर एलपीजी गैस कनेक्शन प्रदान किया जाता है। इसके अलावा, सार्वजनिक परिवहन और स्वास्थ्य सेवाएँ भी सस्ती की गई हैं।

अध्याय 8: कानून और सामाजिक न्याय

1. सामाजिक न्याय का क्या अर्थ है?

सामाजिक न्याय का अर्थ है समाज में सभी वर्गों को समान अवसर और अधिकार प्रदान करना। इसके तहत कमजोर वर्गों को विशेष अधिकार और कानूनी सुरक्षा दी जाती है ताकि वे सामाजिक और आर्थिक रूप से सशक्त हो सकें।

2. मजदूरी अधिनियम का उद्देश्य क्या है?

मजदूरी अधिनियम का उद्देश्य श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी का अधिकार प्रदान करना है। इसके तहत श्रमिकों को उचित वेतन सुनिश्चित किया जाता है, जिससे उनका आर्थिक शोषण रोका जा सके।


3. बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम क्या है?


इस अधिनियम का उद्देश्य 14 साल से कम उम्र के बच्चों से काम 

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भारत में अंग्रेजों के शासनकाल के दौरान कई प्रमुख कानून (एक्ट) पारित किए गए, जो प्रशासन, सामाजिक सुधार, और राजनीति को प्रभावित करते थे। ये एक्ट ब्रिटिश शासन के उद्देश्यों और भारतीय समाज पर उनके प्रभाव को समझने में मदद करते हैं। निम्नलिखित में प्रमुख एक्ट्स का विस्तृत विवरण दिया गया है: 1. रेग्युलेटिंग एक्ट, 1773 (Regulating Act) उद्देश्य: ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रशासन में सुधार करना और ब्रिटिश संसद का नियंत्रण स्थापित करना। मुख्य प्रावधान: बंगाल के गवर्नर को गवर्नर-जनरल का दर्जा दिया गया। मद्रास और बॉम्बे की प्रेसिडेंसियों को गवर्नर-जनरल के अधीन कर दिया गया। कलकत्ता में सुप्रीम कोर्ट की स्थापना की गई। प्रभाव: यह पहला कानून था, जिसने ब्रिटिश सरकार को ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रशासन में हस्तक्षेप करने का अधिकार दिया। 2. पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 (Pitt's India Act) उद्देश्य: कंपनी के व्यापारिक और प्रशासनिक कार्यों को अलग करना और नियंत्रण को सुदृढ़ बनाना। मुख्य प्रावधान: एक नया बोर्ड ऑफ कंट्रोल बनाया गया, जो ब्रिटिश सरकार के अधीन था। कंपनी के प्रशासन में सरकार का नियंत्रण बढ़ा। प्रभाव: कंपनी ...

बड़ी खबर: MP बोर्ड 10वीं और 12वीं का रिजल्ट कल शाम 5 बजे घोषित होगा, माननीय मुख्यमंत्री करेंगे परिणाम जारी!

बड़ी खबर: MP बोर्ड 10वीं और 12वीं का रिजल्ट कल शाम 5 बजे घोषित होगा, माननीय मुख्यमंत्री करेंगे परिणाम जारी! मध्यप्रदेश के लाखों छात्रों का इंतजार अब खत्म! कल दिनांक 06 मई 2025, शाम 5 बजे मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (MPBSE) की ओर से कक्षा 10वीं और 12वीं का परीक्षा परिणाम घोषित किया जाएगा। इस बार परिणाम को विशेष रूप से प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा भोपाल में घोषित किया जाएगा। जो भी छात्र/छात्राएं MP Board Result 2025 देखना चाहते हैं, वे नीचे दिए गए किसी भी लिंक पर क्लिक कर अपना परिणाम देख सकते हैं: Result यहां देखने के लिए यहां क्लिक करें :     https://mpbse.nic.in     https://mpbse.nic.in/results.html     https://mpresults.nic.in     https://mpbse.mponline.gov.in     https://results.gov.in     https://indiaresults.com छात्र अपने रोल नंबर और एप्लीकेशन नंबर डालकर अपना रिजल्ट आसानी से देख सकते हैं। सुझाव: रिजल्ट जारी होते ही वेबसाइट पर भारी ट्रैफिक हो सकता है, इसलिए धैर्य रखें और वैकल्पिक लिंक का उपयोग करें।...