Date - 26/10/2024
डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जीवन परिचय मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। उनका जीवन, कार्य, और योगदान को समझना भारत के स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक, शैक्षणिक सुधारों को जानने के लिए आवश्यक है।
1. जीवन परिचय
डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जन्म 3 दिसंबर 1884 को बिहार के जीरादेई गाँव में हुआ था। वे एक सरल और विनम्र परिवार से थे। उनके पिता का नाम महादेव सहाय और माता का नाम कमलेश्वरी देवी था। वे बचपन से ही बुद्धिमान और परिश्रमी थे। अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने कोलकाता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की और कानून की पढ़ाई में उच्च स्थान प्राप्त किया।
2. स्वतंत्रता संग्राम में योगदान
डॉ. राजेंद्र प्रसाद महात्मा गांधी से प्रेरित होकर स्वतंत्रता संग्राम में शामिल हुए। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य बने और कई बार अध्यक्ष पद पर भी रहे। उन्होंने सविनय अवज्ञा आंदोलन, नमक सत्याग्रह, और भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा। वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महत्वपूर्ण नेता थे और उनकी विनम्रता व साहस को हर भारतीय ने सराहा।
3. सम्मेलन
डॉ. राजेंद्र प्रसाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के विभिन्न सम्मेलनों में भाग लेते थे। वे 1934, 1939, और 1947 में कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए। 1946 में जब भारत की संविधान सभा का गठन हुआ, तो उन्हें इसका अध्यक्ष बनाया गया। 1950 में भारत गणराज्य बनने पर वे देश के पहले राष्ट्रपति बने और 1962 तक इस पद पर बने रहे। उनके नेतृत्व में भारतीय संविधान का निर्माण हुआ और उन्होंने राष्ट्रपति के रूप में भारतीय लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाने में अहम भूमिका निभाई।
4. उनकी लिखित पुस्तकें
डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कई पुस्तकें लिखीं, जिनमें से प्रमुख हैं:
'इंडिया डिवाइडेड' (India Divided): इस पुस्तक में भारत के विभाजन के बारे में उनके विचार और चिंताएं व्यक्त की गई हैं।
'अत्मकथा': इस पुस्तक में उनके जीवन के संघर्षों और सफलताओं का विवरण है।
'महात्मा गांधी एंड बिहार': इस पुस्तक में उन्होंने गांधीजी के साथ बिताए पलों का वर्णन किया है और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान गांधीजी के योगदान का विश्लेषण किया है।
'सत्याग्रह ऐट चंपारण' (Satyagraha at Champaran): इस पुस्तक में उन्होंने चंपारण सत्याग्रह की कहानी लिखी है, जिसमें उन्होंने स्वयं भी भाग लिया था।
5. प्रमुख कथन
"आपका सम्मान इस बात में नहीं है कि आप क्या हैं, बल्कि इस बात में है कि आप क्या करते हैं।"
"यदि हमारी प्रवृत्ति सचमुच धार्मिक है, तो हमारी सभी क्रियाएं न केवल अपने और अपने परिवार के लिए, बल्कि हमारे देश के लिए भी सहायक होंगी।"
6. शिक्षा में योगदान
डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दिया। उन्होंने हमेशा शिक्षा के महत्व को समझा और इसे हर व्यक्ति के लिए सुलभ बनाने का प्रयास किया। उनका मानना था कि एक शिक्षित समाज ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण कर सकता है। वे पटना विश्वविद्यालय के कुलपति भी रहे और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में योगदान दिया। उन्होंने स्वतंत्र भारत में शिक्षा प्रणाली को प्रगतिशील और समावेशी बनाने के लिए कई सुधार किए।
यहाँ डॉ. राजेंद्र प्रसाद से संबंधित 20 महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर दिए गए हैं, जो मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की परीक्षा की दृष्टि से सहायक हो सकते हैं।
प्रश्न-उत्तर
1. प्रश्न: डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
उत्तर: 3 दिसंबर 1884 को बिहार के जीरादेई गाँव में।
2. प्रश्न: डॉ. राजेंद्र प्रसाद का मुख्य पेशा क्या था?
उत्तर: वे वकील थे और बाद में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बने।
3. प्रश्न: डॉ. राजेंद्र प्रसाद को "राजेन्द्र बाबू" के नाम से भी क्यों जाना जाता था?
उत्तर: उनकी सरलता, सादगी और अपनेपन के कारण लोग उन्हें "राजेन्द्र बाबू" कहकर पुकारते थे।
4. प्रश्न: डॉ. राजेंद्र प्रसाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कितनी बार अध्यक्ष बने?
उत्तर: तीन बार - 1934, 1939 और 1947 में।
5. प्रश्न: उन्हें संविधान सभा का अध्यक्ष कब चुना गया?
उत्तर: 1946 में।
6. प्रश्न: भारत के पहले राष्ट्रपति के रूप में डॉ. राजेंद्र प्रसाद का कार्यकाल कब से कब तक था?
उत्तर: 26 जनवरी 1950 से 13 मई 1962 तक।
7. प्रश्न: राष्ट्रपति के रूप में उन्हें कितनी बार चुना गया?
उत्तर: दो बार (1950 और 1957 में)।
8. प्रश्न: राष्ट्रपति पद से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें कौन-सा सम्मान मिला?
उत्तर: भारत रत्न, 1962 में।
9. प्रश्न: डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा लिखित प्रमुख पुस्तक का नाम क्या है जिसमें भारत विभाजन का वर्णन है?
उत्तर: 'इंडिया डिवाइडेड' (India Divided)।
10. प्रश्न: डॉ. राजेंद्र प्रसाद की आत्मकथा का क्या नाम है?
उत्तर: 'अत्मकथा'।
11. प्रश्न: स्वतंत्रता संग्राम में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कौन-कौन से प्रमुख आंदोलन में भाग लिया?
उत्तर: चंपारण सत्याग्रह, नमक सत्याग्रह, सविनय अवज्ञा आंदोलन, भारत छोड़ो आंदोलन।
12. प्रश्न: चंपारण सत्याग्रह में डॉ. राजेंद्र प्रसाद की क्या भूमिका थी?
उत्तर: वे गांधीजी के साथ चंपारण सत्याग्रह में किसानों के अधिकारों के लिए लड़े।
13. प्रश्न: डॉ. राजेंद्र प्रसाद किस विश्वविद्यालय के कुलपति बने थे?
उत्तर: पटना विश्वविद्यालय के।
14. प्रश्न: उनका प्रमुख कथन क्या है?
उत्तर: "आपका सम्मान इस बात में नहीं है कि आप क्या हैं, बल्कि इस बात में है कि आप क्या करते हैं।"
15. प्रश्न: उनके शिक्षा सुधार के लिए किए गए कार्यों में मुख्य क्या था?
उत्तर: सभी के लिए शिक्षा सुलभ बनाना और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारना।
16. प्रश्न: उनकी मृत्यु कब और कहाँ हुई?
उत्तर: 28 फरवरी 1963 को पटना, बिहार में।
17. प्रश्न: डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने स्वदेशी आंदोलन को कैसे समर्थन दिया?
उत्तर: उन्होंने स्वदेशी उत्पादों को अपनाने पर जोर दिया और विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार किया।
18. प्रश्न: 'सत्याग्रह ऐट चंपारण' पुस्तक किसने लिखी?
उत्तर: डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने।
19. प्रश्न: डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने संविधान सभा में किस महत्वपूर्ण सिद्धांत पर बल दिया?
उत्तर: समानता और सभी के लिए एक समान अवसर के सिद्धांत पर।
20. प्रश्न: राजेंद्र प्रसाद का भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में योगदान क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है?
उत्तर: उनके नेतृत्व, गांधीजी के साथ सघर्ष, और उनके साहसिक कार्यों के कारण उन्हें एक प्रमुख स्वतंत्रता संग्राम सेनानी माना जाता है।
ये प्रश्न और उत्तर डॉ. राजेंद्र प्रसाद के जीवन, कार्य और योगदान को समर्पित हैं, और MPPSC जैसी परीक्षाओं के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।

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