Date - 09/10/2024
कक्षा - 7वीं
विषय - सामाजिक विज्ञान
सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन - भाग II
इस पुस्तक के विभिन्न अध्याय भारतीय लोकतंत्र, समानता, राज्य सरकार की भूमिका, स्वास्थ्य, जेंडर (लड़के और लड़कियों के बीच भेदभाव) और शासन की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालते हैं। यह सारांश इन अध्यायों का एक उपयोगी और प्रतियोगी परीक्षा दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण व्याख्या है।
इकाई 1: भारतीय लोकतंत्र में समानता
अध्याय 1: समानता
समानता भारतीय लोकतंत्र की नींव है। संविधान सभी नागरिकों को समानता का अधिकार देता है, जिसमें जाति, धर्म, लिंग, आर्थिक स्थिति, या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव को रोकने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के हर नागरिक को समान अवसर मिलें और वह गरिमापूर्ण जीवन व्यतीत कर सके।
उदाहरण:
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 से 18 तक समानता का अधिकार प्रदान किया गया है, जो जाति, लिंग, धर्म आदि के आधार पर भेदभाव का निषेध करते हैं।
शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम 2009 यह सुनिश्चित करता है कि सभी बच्चों को प्राथमिक शिक्षा मुफ्त में मिले।
इस अध्याय में यह भी बताया गया है कि समानता केवल कानून तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसका पालन सामाजिक और आर्थिक रूप से भी होना चाहिए। भारत जैसे विविधता वाले समाज में, असमानता को दूर करने के लिए कई सरकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। उदाहरणस्वरूप, मिड-डे मील योजना के माध्यम से गरीब बच्चों को पोषणयुक्त भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है ताकि वे स्कूल में नियमित रूप से पढ़ाई कर सकें।
इकाई 2: राज्य सरकार
अध्याय 2: स्वास्थ्य में सरकार की भूमिका
इस अध्याय में स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार की भूमिका को रेखांकित किया गया है। स्वस्थ जीवन जीने का अधिकार प्रत्येक नागरिक का मूल अधिकार है। सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाने के लिए अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और स्वच्छता कार्यक्रमों की स्थापना करती है।
उदाहरण:
भारत सरकार द्वारा शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना गरीब और वंचित वर्गों के लिए 5 लाख रुपये तक की मुफ्त चिकित्सा सेवा प्रदान करती है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम), ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने का प्रयास करती है। इसके तहत ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र और सब-सेंटर्स की स्थापना की गई है ताकि ग्रामीण और गरीब तबके तक सस्ती और प्रभावी चिकित्सा सेवाएं पहुंचाई जा सकें।
सरकार की जिम्मेदारी है कि वह न केवल इलाज मुहैया कराए, बल्कि बीमारियों को रोकने के लिए भी जागरूकता फैलाए। सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए सरकार स्वच्छ पेयजल, स्वच्छता और टीकाकरण अभियान चलाती है।
अध्याय 3: राज्य शासन कैसे काम करता है
यह अध्याय राज्य सरकार की संरचना और कामकाज को समझाता है। राज्य सरकार का प्रमुख मुख्यमन्त्री होता है और उसके तहत विभिन्न विभागों का संचालन होता है। राज्य की विधान सभा (विधानमंडल) का कार्य कानून बनाना और राज्य की समस्याओं का समाधान करना है। प्रत्येक राज्य में चुने गए विधायक सरकार के विभिन्न विभागों को नियंत्रित करते हैं।
उदाहरण:
एक राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क निर्माण, बिजली आपूर्ति और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों का समाधान करती है।
जब कोई समस्या उत्पन्न होती है, जैसे पानी की कमी, तो विधायक इस मामले को विधानसभा में उठाते हैं और राज्य सरकार इस पर कार्यवाही करती है।
विधानसभा में विधायकों द्वारा लाए गए विधेयकों को बहुमत से पास करने के बाद मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिमंडल द्वारा लागू किया जाता है। राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है, जो राज्य की कार्यपालिका के कामकाज की निगरानी करता है।
इकाई 3: लिंग बोध (जेंडर)
अध्याय 4: लड़के और लड़कियों के रूप में बड़ा होना
यह अध्याय जेंडर भेदभाव के विषय को उजागर करता है, जो समाज में प्रचलित है। लड़के और लड़कियों के प्रति समाज में अलग-अलग अपेक्षाएं होती हैं, जो उनके व्यक्तित्व विकास और जीवन के अनुभवों पर गहरा प्रभाव डालती हैं।
उदाहरण:
कई परिवारों में लड़कियों से घरेलू काम की अपेक्षा की जाती है, जबकि लड़कों को बाहरी कार्यों में ज्यादा स्वतंत्रता दी जाती है।
समाज में लड़कियों को कमजोर और लड़कों को मजबूत माना जाता है, जो जेंडर आधारित असमानता का एक बड़ा कारण है।
इस अध्याय में यह भी समझाया गया है कि लड़कियों और लड़कों के प्रति समाज में यह भेदभाव उनके भविष्य को प्रभावित करता है। लड़कियों को शिक्षा और नौकरी के अवसरों में लड़कों की तुलना में कम मौके मिलते हैं, जिससे उनका आर्थिक और सामाजिक विकास बाधित होता है।
उदाहरण:
सावित्रीबाई फुले ने 19वीं सदी में महिलाओं की शिक्षा के लिए अभियान चलाया था। उन्होंने महिला शिक्षा के महत्व को समझाते हुए समाज की मानसिकता बदलने का प्रयास किया।
आज भी महिलाओं की शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में समान भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसी योजनाएं शुरू की हैं।
अध्याय 5: औरतों ने बदली दुनिया
इस अध्याय में महिलाओं की भूमिका और उनके द्वारा समाज में किए गए बदलावों पर चर्चा की गई है। सदियों से महिलाओं को घर की चारदीवारी तक सीमित रखा गया था, लेकिन जैसे-जैसे समय बदला, महिलाओं ने सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उदाहरण:
सावित्रीबाई फुले ने महिलाओं की शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति की शुरुआत की थी। उन्होंने समाज में महिलाओं की शिक्षा के महत्व को बढ़ावा दिया, जिससे महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला।
इंदिरा गांधी भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई।
इस अध्याय में यह भी बताया गया है कि महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों में जैसे कि चिकित्सा, विज्ञान, व्यापार, कला और खेलों में भी अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। मैरी कॉम जैसे खिलाड़ियों ने देश का नाम रोशन किया है और महिला सशक्तिकरण के प्रतीक के रूप में उभरी हैं।
महिलाओं की सामाजिक और राजनीतिक जागरूकता ने न केवल उनके जीवन में सुधार किया है, बल्कि समग्र समाज को भी प्रभावित किया है। आज की महिलाएं पढ़ाई, रोजगार और राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। सरकार द्वारा चलाई जा रही महिला सशक्तिकरण योजनाएं जैसे "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" महिलाओं को और भी सशक्त बना रही हैं।
अध्याय 6: संचार माध्यमों को समझना
संचार माध्यम, जिन्हें अक्सर "मीडिया" कहा जाता है, समाज में जानकारी और विचारों को प्रसारित करने के मुख्य साधन हैं। यह अध्याय संचार माध्यमों के महत्व और उनकी भूमिका को स्पष्ट करता है। संचार माध्यमों में मुख्य रूप से अखबार, रेडियो, टीवी और इंटरनेट शामिल हैं।
उदाहरण:
अखबार सबसे पुराने और विश्वसनीय संचार माध्यमों में से एक है, जो समाज को रोजाना की घटनाओं और समाचारों से अवगत कराता है।
रेडियो भी जानकारी और मनोरंजन के लिए एक महत्वपूर्ण साधन है, विशेष रूप से दूरदराज के क्षेत्रों में।
टीवी ने सूचना और मनोरंजन के क्षेत्र में क्रांति ला दी है। यह दृश्य माध्यम समाचार, शिक्षा और मनोरंजन को घर-घर तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है।
इंटरनेट ने सूचना के आदान-प्रदान को सबसे तेज और प्रभावी बना दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के माध्यम से लोग आपस में संवाद कर सकते हैं, विचार साझा कर सकते हैं और दुनियाभर की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
हालांकि संचार माध्यमों के कई फायदे हैं, लेकिन इसके कुछ नुकसान भी हैं। कभी-कभी गलत या भ्रामक जानकारी फैलाने के कारण समाज में भ्रम और तनाव उत्पन्न हो सकता है। इसके अलावा, मीडिया का कभी-कभी व्यावसायिक लाभ के लिए दुरुपयोग भी किया जाता है। इसलिए यह जरूरी है कि लोग मीडिया का उपयोग सावधानीपूर्वक करें और सही जानकारी के स्रोतों पर विश्वास करें।
अध्याय 7: हमारे आस-पास के बाजार
यह अध्याय बाजार की भूमिका और उसके विभिन्न प्रकारों को समझाता है। बाजार हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं, क्योंकि यह वह जगह है जहां हम अपनी दैनिक आवश्यकताओं की वस्तुएं खरीदते हैं। बाजार केवल खरीदने और बेचने का स्थान नहीं है, बल्कि यह समाज और आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र है।
उदाहरण:
स्थानीय बाजार: ये बाजार छोटे और आस-पास के क्षेत्र के लोगों के लिए होते हैं, जहां रोजमर्रा की जरूरतों की चीजें जैसे सब्जियां, फल, कपड़े आदि मिलते हैं।
साप्ताहिक बाजार: यह बाजार एक विशेष दिन पर लगते हैं, जहां स्थानीय विक्रेता अपने सामान बेचते हैं। ये बाजार ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में काफी लोकप्रिय होते हैं।
थोक बाजार: थोक बाजार में व्यापारी बड़े पैमाने पर वस्तुओं का क्रय-विक्रय करते हैं। उदाहरण के लिए, खाद्य पदार्थ, कपड़े और अन्य वस्तुएं थोक बाजार से खुदरा विक्रेताओं द्वारा खरीदी जाती हैं और फिर उन्हें उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाता है।
बाजारों में लोग न केवल वस्तुओं का आदान-प्रदान करते हैं, बल्कि यह लोगों के बीच संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी एक महत्वपूर्ण स्थल होते हैं। बाजारों के माध्यम से हमें सामाजिक संरचनाओं और लोगों के आपसी रिश्तों को समझने का मौका मिलता है।
बाजार की संरचना और कामकाज से यह भी समझ आता है कि किस प्रकार समाज में विभिन्न वर्गों के लोग अपनी आर्थिक गतिविधियों के जरिए एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं। उदाहरण के तौर पर, एक किसान अपनी फसल को थोक विक्रेता को बेचता है, जो इसे खुदरा बाजार तक पहुंचाता है, और अंततः उपभोक्ता इसे खरीदते हैं।
अध्याय 8: बाजार में एक कमीज
इस अध्याय में किसी वस्त्र के निर्माण से लेकर उसे उपभोक्ता तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया को समझाया गया है। यह अध्याय दिखाता है कि किस प्रकार एक साधारण वस्त्र, जैसे कि कमीज, विभिन्न चरणों से गुजरता है और विभिन्न लोगों की मेहनत का परिणाम होता है।
उदाहरण:
कपास की खेती से शुरू होकर यह प्रक्रिया कपड़े की कताई, बुनाई, रंगाई, सिलाई, और अंततः बाजार में बिक्री तक जाती है।
- किसान कपास उगाता है और इसे बाजार में बेचता है।
- बुनकर इस कपास से धागे बनाते हैं, जिनसे कपड़ा बुना जाता है।
- फिर रंगरेज कपड़े को विभिन्न रंगों में रंगता है, और दर्जी इससे कमीज जैसी वस्त्र तैयार करता है।
- अंत में, विक्रेता इस वस्त्र को बाजार में बेचता है और इसे उपभोक्ता तक पहुंचाता है।
यह प्रक्रिया केवल उत्पादकों और विक्रेताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें शामिल हर व्यक्ति का इस बाजार व्यवस्था में योगदान होता है। यह अध्याय दिखाता है कि एक छोटी सी चीज, जैसे एक कमीज, कई लोगों की मेहनत और श्रम का परिणाम होती है। साथ ही, बाजार में वस्त्र के मूल्य निर्धारण में भी कई कारक होते हैं, जैसे कच्चे माल की कीमत, श्रम लागत, और बाजार की मांग।


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